प्रयागराज ( अनुराग दर्शन समाचार )। प्रयागराज के शंकराचार्य जी, सन्त, महात्मा और सभी श्रेष्ठ गुरूजनों से निवेदन है कि दिनांक 5 जुलाई को पढने वाले ( गुरू पूर्णिमा ) को हजारों वर्षों से चली आ रही गुरू शिष्य परम्परा को ईस बार देश मे फैले कोरोना जैसे महामारी वायरस जिसकी कोई दवा नहीं है ईस महामारी बिमारी का सिर्फ एक हि ईलाज है ।
मुंह में मास्क, दो गज की दूरी बनाए रखना और हाथ को सेनेटाईजर या साबुन से दिन मे 4 बार 20 सेकेन्ड तक हाथ धोना ईस बार सभी गुरुजनों से निवेदन है ईसका पालन करते हुये अपने अपने मठ,मन्दिरों, आश्रमो मे होने वाले गुरू पूर्णिमा समारोह दूर दराज से आने वाले शिष्यों को ईस महामारी से बचाने के लिए उनसे आग्रह निवेदन करे की वे दूर का सफर कर न आये और अपने गुरूओं के छाया चित्रों पर उनकी पूजा कर आशीर्वाद प्राप्त करे।
और जो अस्थानिय शिष्य है वे भी ऐसा करे अगर जो स्थानीय शिष्य अपने गुरू के पास आते है तो सभी गुरुजनों से निवेदन है।
अपने अपने मठ, मन्दिर, आश्रमो मे बाहर जल की व्यवस्था करे और सेनेटाईजर या साबुन गेट के पास रखे जिससे आनें वाले शिष्य पैर हाथ धोकर सेनेटाईज कर के प्रवेश करे और गुरू जन अपने सिंहासन, या बैठने वाले स्थान पर गुरू शिष्य की दो गज की दूरी नाप कर डोरी या रस्सी बाँध दे और अपने चरण न छुआये और चन्दन टिका माला जो है।
वही ऐक छोटी चौकी रख कर गुरू अपनी तस्वीर और चरण पादूका रखे जिससे गुरू के पूजन अर्चन शिष्य अपने गुरू परम्परा के अनुसार करे और होने वाले भंडारे मे भोजन, प्रसाद का पंगत न लगाकर आये हुये भक्तों, शिष्यों को पैकट मे रखकर वितरण करे जिससे फैल रही ईस महामारी से बचा जा सके ।