
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। श्रावण मास में पड़ने वाले नागपंचमी पर्व जिसे गुड़िया का मेला भी कहा जाता है कोरोना महामारी को देखते हुए सभी कार्यक्रम स्थगित कर दिए गए हैं वहि दारागंज स्थित प्रसिद्ध नागवासुकि मंदिर समेत शिव मंदिरों में सर्प का पूजन कर उनके प्रकोप से मुक्ति की कामना की जा रही है। वहीं, कोरोना वायरस संक्रमण के कारण अखाड़ों में कुश्ती व दंगल का आयोजन इस बार नहीं होगा। वहीं कोरोना संक्रमण के कारण ही मंदिरों में भी अधिक भीड़ नहीं जुट रही है, लोग घरों में भी पूजन-अर्चन कर रहे हैं।
आचार्य बोले-पंचमी तिथि दोपहर में 1.53 बजे तक रहेगी
आचार्य सोनू जी महाराज बताते हैं कि पंचमी तिथि शनिवार को दिन में 1.53 बजे तक रहेगी। पूजन का विशेष मुहूर्त सुबह 5.42 बजे से 8.33 बजे तक है। नाग पंचमी पर व्रत रखकर भगवान शिव व नाग का पूजन करने वाले व्यक्ति को वर्ष भर सर्प के भय से मुक्ति मिल जाती है। नाग पंचमी के साथ ङ्क्षहदू धर्म के पर्वों की शुरुआत हो जाएगी।
इन नागों की होती है पूजा
आचार्य सोनू जी महाराज ने बताया नाग पंचमी पर अनंत, वासुकि, पद्म, महापद्म, तक्षक, कुलीर, कर्कट और शंख नामक नाग की पूजा करने का विधान है। पूजा के लिए नागदेव का चित्र चौकी के ऊपर रखें। उसमें हल्दी, रोली, अक्षत (चावल) और पुष्प अर्पित करें। नागदेव को कच्चा दूध, घी, चीनी मिलाकर अॢपत करें। पूजा के बाद सर्प देवता की आरती उतारकर नाग पंचमी की कथा सुनना अथवा कहना चाहिए।
काल सर्प दोष से मुक्ति को यह करें
कुंडली में काल सर्प दोष से मुक्ति के लिए नाग पंचमी पर विशेष पूजा होती है। आचार्य विद्याकांत पांडेय बताते हैं कि रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जप, पंचाक्षर का जप कराना चाहिए। किसी भी धातु से बने नाग-नागिन के जोड़े का पूजन करके बहते हुए जल में प्रवाहित करना चाहिए। या जिंदा सर्प को खरीद कर उसकी पूजा करके मुक्त कर दें। ऐसा करने से काल सर्प दोष से मुक्ति मिल जाती है।
चना, मटर और सेवइयों की हुई तैयारी
घरों में नागपंचमी का पर्व मनाने के लिए पकवान बनाने की तैयारी घरों में शुक्रवार शाम तक हो गई। चने, मटर, दूध वाली सेवइयां, पूड़ी और सब्जी के लिए मेन्यू तैयार हो गए हैं।