बंदर आगे – आगे गुंबद पर चढ़ते रहे पीछे – पीछे कारसेवक गुंबद गिराते रहे-वासुदेवानंद सरस्वती

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। श्री राम जन्मभूमि मुक्ति अभियान में उक्त बातें श्रीमठ ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी ने कहा सभी प्रमुख घटनाओं के दिन एक बंदर की उपस्थिति हमेशा रही है l जब उच्च न्यायालय लखनऊ बेंच का निर्णय भगवान राम के पक्ष में आया था तब मैं माननीय अशोक सिंघल जी, तथा कुछ अन्य महात्मा, हमारे ब्रह्म निवास अलोपीबाग प्रयागराज में बैठकर टीवी में समाचार सुन रहे थे, तब एक बंदर आश्रम के छत पर बैठा था जब पूरा समाचार समाप्त हो गया तो वह भी उतर कर चला गया l
इसी प्रकार जब 1990 की कार सेवा हुई तब भी वहां (मंदिर परिसर में) मंदिर पर बंदर बैठा रहा l वैसे तो अक्टूबर 1990 में भी राम कार सेवा के समय 30 अक्टूबर व 2 नवंबर को कारसेवकों पर गोली चलाई जाने से बड़ी संख्या में श्रीराम कार सेवकों की हत्या हो गई थी, बहुत घायल भी हुए थे जिससे पूरे देश का हिंदू साधु – संत समाज दुखी हुआ नाराज हो गयाl किंतु माननीय अशोक सिंघल जी (अब स्वर्गीय) ने 2 वर्षों तक कड़ी मेहनत करके 6 दिसंबर 1992 के दिन कार सेवा किए जाने की घोषणा कर दी जिसमें सभी साधु-संतों, मठ मंदिरों, अखाड़ों का विभिन्न सनाती विचारधारा के लोगों की सहमति थी l
1990 की कार सेवा में हमारी भी गिरफ्तारी हो गई थी l गिरफ्तारी फाफामऊ के पुल के पास लाखों कारसेवकों के बीच हुई थी l श्री राम चौक, श्री सुभाष चौराहा सिविल लाइन से अनगिनत कारसेवकों के साथ अयोध्या के लिए अपने रथ से मैंने प्रस्थान किया l तेलियरगंज तक श्रीराम कार सेवकों का विस्तार था-जय श्री राम, राम लला हम आएंगे मंदिर वहीं बनाएंगे के उद्देश्य के साथ बढ़ते जा रहे थे l फाफामऊ के पुल पर भी कार सेवकों का जमावड़ा था l पुलिस व प्रशासन के अधिकारी परेशान हो गए l फिर आकर मुझे कारसेवकों को पुल पर से हटने का आवाहन करने को कहा l वहीं से मुझे गिरफ्तार करके पहले फतेहपुर ले जाकर जेल में रखा फिर दूसरे दिन कालपी ले गए l 2 अक्टूबर तक मुझे गिरफ्तार रखा गया l मेरे साथ महामंडलेश्वर विष्णु पुरी जी निर्वाणी अखाड़ा महामंडलेश्वर मनोहर पुरी जी, ज्योतिष पीठ के स्वामी विद्यानंद जी (मोनी बाबा) सहित दर्जनों वरिष्ठ संत महात्मा गिरफ्तार थेl
कारसेवकों पर 30 अक्टूबर एवं 2 नवंबर 1990 के गोली कांड के बाद 6 दिसंबर 1992 को होने वाली कार सेवा में पूरे देश से श्रद्धालु, भक्त, पुरुष, महिलाएं, बूढ़े और बच्चे भी साधनों से, पहुंचे l उन्हें नियंत्रित व अनुशासित रखने के लिए विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारी, नेता व देश के शीर्षस्थ संत तथा माननीय अशोक सिंघल जी भी वहां उपस्थित रहे l सब में अद्भुत जोश एवं उत्साह था l मैं भी 1992 को 6 दिसंबर की कार सेवा में गया था l सबके मन में उमंग था, उत्साह था, कार सेवा की भावना थी l सफलता का विश्वास भी था, वरिष्ठ नेताओं एवं पदाधिकारियों के मन में प्रमुख चिंता थी कारसेवकों को नियंत्रित व अनुशासित रखने की l मैं भी अनुष्ठान – पूजा पर बैठ चुका थाl लगभग 10:30 बजे कारसेवकों का जत्था श्रीराम कार सेवा के लिए मंदिर परिसर में आगे बढ़ा l देखते ही देखते पहला ढांचा ध्वस्त हो गया l लगभग शाम 5:00 से 5:30 तीसरा अंतिम ढांचा ध्वस्त हो गयाl देखते ही देखते भगवान राम के मंदिर के ढांचे की धूल आसमान में तैरने लगी l मंच पर विराजमान नेता व पदाधिकारी व संत कारसेवकों को बार-बार रोकने की घोषणा कर रहे थे किंतु किसी ने किसी की नहीं सुनी और पुराना ढांचा ध्वस्त हो गया नए के निर्माण का रास्ता साफ हो गया l

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