
काशी (अनुराग दर्शन समाचार )। श्री काशी सुमेरु पीठाधीश्वर यति सम्राट अनन्त श्री विभूषित पूज्य जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती जी महाराज ने आज काशी के पंचकोशी अन्तर्गत ग्राम-देउरा, पोस्ट-काशीपुर (राजातालाब), जनपद-वाराणसी स्थित श्री आदि शंकराचार्य महा संस्थानम् में अपने चातुर्मास साधना के क्रम में कोरोना महामारी पर विजय, श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर के निर्विघ्न निर्माण हेतु श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों को सद्बुद्धि, सामर्थ्य की प्राप्ति, सनातन धर्म की अभिवृद्धि तथा चराचर जगत में सुख, शान्ति, समृद्धि के लिए ११ वैदिक विद्वानों के साथ भगवान चन्द्रमौलिश्वर का सविधि एकादशमी रूद्राभिषेक किया |
शंकराचार्य जी महाराज ने सनातन धर्मावलम्बियों को अपने आशिर्वचन एवम् उपदेश में कहा
मुक्ति के लिए मन की शुद्धता आवश्यक है | शुद्ध सात्विक मन ही मुक्ति का कारण बन जाता है |इसे शुद्ध करने के लिए सर्वप्रथम आत्म-अनात्म वस्तु का विवेक आवश्यक है, जिससे दोनों में भेद किया जा सके | इसके बाद अनात्म वस्तु विषयों के प्रति वैराग्य अर्थात आसक्ति का त्याग कर देना चाहिए | जिससे आत्म वस्तु को प्राप्त किया जा सके | इन दोनों के दृढ़ हुए बिना ज्ञान प्राप्त नहीं होता, तथा बिना ज्ञान के मुक्ति नहीं होती | मोक्ष प्राप्ति की इच्छा वाले के लिए यह अनिवार्य है |