इलाहाबाद हाईकोर्ट-कोविड गाइडलाइन का पालन कराएं डीएम व एएसएसपी

कोविड गाइडलाइन का पालन कराएं डीएम व एएसएसपी

एसआरएन के एल-3 हॉस्पिटल की सुविधाओं को बताया नाकाफी

नगर निगम का अतिक्रमणरोधी व फॉगिंग अभियान कागजी: हाईकोर्ट

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार) । उत्तर प्रदेश कोरोना वायरस का संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। यदि ऐसे ही लापरवाही चलती रही तो आगे चलकर यह महामारी बड़ा खतरा बन सकती है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए कोरोना प्रभावित सभी जिलों के डीएम व एसएसपी को फिजिकल डिस्टेंसिंग और मास्क पहनने को लेकर जारी गाइडलाइन का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
वहीं कोरोना पॉजिटिव मरीजों के इलाज के लिए स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल (एसआरएन) में बनाए गए एल-3 हॉस्पिटल में चिकित्सा सुविधाओं को नाकाफी माना है। साथ ही आईसीयू और अन्य वार्डों में डॉक्टरों व नर्सों की संख्या प्रति मरीज के हिसाब से बढ़ाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार से अन्य अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाओं पर भी जानकारी मांगी है। अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने कोर्ट को बताया कि एसआरएन को कोरोना इलाज के लिए लेबल-थ्री हॉस्पिटल बनाया गया है। यहां आईसीयू में 40 बेड हैं। इन पर हर समय चार डॉक्टर तैनात रहते हैं। इसके अलावा आइसोलेशन वार्ड में 156 बेड हैं। कोर्ट ने कहा कि वार्ड में डॉक्टरों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। इस पर कोर्ट ने अगली सुनवाई पर यह बताने को कहा है कि कब-कब अतिरिक्त डॉक्टरों को बुलाया गया।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा एवं न्यायमूर्ति अजीत कुमार की खंडपीठ को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए डीएम भानुचंद्र गोस्वामी और एसएसपी अभिषेक दीक्षित कोर्ट के समक्ष उपस्थित हुए। कोर्ट ने अधिकारियों की ओर से दी गई जानकारी के बाद उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही फिलहाल लंबित कर दी है। कोर्ट ने डीएम से जानना चाहा कि उन्होंने सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन लागू करने के संबंध में कब आदेश दिया। इसका जवाब डीएम तत्काल नहीं दे सके। उन्होंने कहा कि रिकार्ड देखकर बता सकेंगे कि आदेश कब जारी किया था।
कोर्ट ने एसआरएन के कोरोना वार्ड में भर्ती महिला की टॉयलेट जाते समय फिसलकर गिरने से हुई मौत के मामले में उच्च स्तरीय जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। साथ ही एसआरएन के कोरोना वार्डों में तैनात डॉक्टरों और नर्सों को पूरा ब्यौरा मांगा है। नगर निगम द्वारा चलाए गए अतिक्रमण विरोधी और फॉगिंग अभियान को कागजी करार देते हुए कोर्ट ने अधिवक्ता चंदन शर्मा व राम कौशिक को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया है। दोनों अधिवक्ता नगर निगम के दावों की जांच कर कोर्ट को अपनी रिपोर्ट देंगे। नगर निगम के अधिवक्ता एसडी कौटिल्य ने कोर्ट को बताया कि निगम में वर्तमान में कोई डॉक्टर तैनात नहीं है। मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी। कोर्ट ने आदेश की प्रति प्रदेश के सभी जिलाधिकरियों और पुलिस अधीक्षकों को भेजने का निर्देश दिया है।

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