24वीं पूण्यतिथि पर याद किये गये पुरी के पूर्व शंकराचार्य निरंजन देव तीर्थ

मथुरा (अनुराग दर्शन समाचार )। पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ ने पुरी के बृह्मलीन शंकराचार्य स्वामी निरंजन देवतीर्थ को भारतीय संस्कृति का सशक्त प्रचारक बताया है। उन्होंने कहा कि सनातन संन्यास परंपरा को जीवंत बनाने में स्वामी निरंजन देवतीर्थ का योगदान अतुलनीय है। जगद्गुरु अधोक्षजानंद देवतीर्थ बुधवार को पुरी पीठ के पूर्व शंकराचार्य को उनकी 24वीं पूण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बृह्मलीन शंकराचार्य स्वामी निरंजन देवतीर्थ ने भारतीय संस्कृति की अनमोल धरोहर गाय, गंगा और गीता के संरक्षण और संवर्धन को लेकर आजीवन संधर्ष किया। गोहत्या के खिलाफ तत्कालीन केंद्र सरकार के विरुद्ध उन्होंने देश की राजधानी दिल्ली में 72 दिन का अनशन भी किया था। मथुरा के गोवर्धन स्थित आद्य शंकराचार्य आश्रम में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में अरुणाचल प्रदेश से राज्यसभा सांसद नाबम रिबिया भी सपत्नीक उपस्थित रहे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पूज्य संत और शंकराचार्य भारतीय सनातन संस्कृति की पहचान हैं। हमें इनसे सदैव प्रेरणा लेते रहना चाहिए। कोरोना संक्रमण के कारण कार्यक्रम को आनलाइन आयोजित किया गया था, जिससे देश भर के श्रद्धालु जुड़े हुए थे। कार्यक्रम स्थल पर कोरोना प्रोटोकाल के तहत शारीरिक दूरी का पालन करते हुए महंत रामेश्वरदास, ब्रहर्षि बालक दास, गोपाल दास, जंगी ब्रह्मचारी, कोतवाल और आचार्य शिवम द्विवेदी ने भी बृह्मलीन शंकराचार्य स्वामी निरंजन देवतीर्थ को पुष्पांजलि अर्पित की। गौरतलब है कि पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ गोवर्धन स्थित शंकराचार्य आश्रम में ही इस समय चातुर्मास व्रत का अनुष्ठान कर रहे हैं। संत और संन्यासी लोग चातुर्मास के दौरान एक ही स्थान पर प्रवास कर व्रत और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का पालन करते है। शंकराचार्य ने बताया कि कोरोना संक्रमण के कारण चातुर्मास के समय श्रद्धालुओं का आना जाना निषिद्ध किया गया है, लेकिन विशेष अनुष्ठानों का लाभ उन्हें आनलाइन कराया जाता है।

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