माहे मोहर्रम की चौथी को विभिन्न अज़ाखानों में हुई मजलिस इमामबाड़ा सफदर अली बेग में निकला दुलदुल

मौलाना आमिरुर रिज़वी ने मजलिस में तक़रीर करते हुए बयान किया करबला के शहीदों पर ढ़ाए गए ज़ुल्म की दास्ताँ

अन्जुमन अब्बासिया के नौहाख्वानों ने पढ़ा दर्द भरा नौहा

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। माहे मोहर्रम की चार तारीख को शहर भर के इमामबाड़ों व अज़ाखानों मे मजलिसें आयोजित कर करबला के बहत्तर शहीदों को याद किया गया। प्रातः ७ बजे से शुरु हुई अशरे की मजलिस देर रात तक विभिन्न अज़ाखानों पर होती रही।बख्शी बाज़ार मस्जिद क़ाज़ी साहब,इमामबाड़ा नज़ीर हुसैन,इमामबाड़ा खुर्शैद हुसैन,अबरार हुसैन व ज़व्वार हुसैन में तुफान दरियाबादी,अली हुसैन ने ग़मगीन मसायब ए अहलेबैत पढ़े।वहीं चक पर मौलाना रज़ी हैदर व घंटा घर पर मौलाना रज़ा अब्बास ज़ैदी ने ऑनलाईन मजलिस को खेताब किया।पान दरिबा में इमामबाड़ा मिर्ज़ा वाजिद अली व मिर्ज़ा सफदर अली बेग मे हुई अशरे की चौथी मजलिस को इरान से पधारे मौलाना आमिरुर रिज़वी ने खिताब करते हुए आले रसूल पर यज़ीदी लश्कर द्वारा तीन दिन का भूखा प्यासा शहीद कर देने का ग़मगीन वाक़ेया सुनाया तो लोगों की आँखे छलक पड़ीं।अज़ादार सर ज़मीन ए करबला में खानवादा ए रसूल पर ढाए गए ज़ुल्म की दास्ताँ सुन कर अश्कबार हो गए।मजलिस के बाद इमाम हुसैन के वफादार घोड़े ज़ुलजनाह की शबीह भी ज़ियारत को निकाली गई।गुलाब और चमेली के साथ सूती कपड़ों से खून आलूदा दुलदुल जब लोगों के बीच ज़ियारत को लाया गया तो उसका बोसा लेने और मन्नते व मुरादें मांगने वालों ने गिरया ओ ज़ारी कर मन्नत व मुरादें मांगते हुए कोरोना महामारी से सभी को महफूज़ रखने के साथ इस वबा से निजात की दूआ भी मांगी।अन्जुमन अब्बासिया रानी मण्डी के नौहा ख्वानों ने पुरदर्द नौहा पढ़ते हुए मातम किया।मजलिस में मंज़र कर्रार,सै०मो०अस्करी,ज़ामिन हसन,शजीह अब्बास,मीसम रिज़वी करारवी,मिर्ज़ा बाबर,मिर्ज़ा इक़बाल हुसैन हुमायूँ,सुहैल,शमशाद,मुन्ना,सलीम,माहे आलम,छोटे बाबू,मुर्तुज़ा अली बेग,मुस्तफा अली बेग,शाहरुक़ क़ाज़ी समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

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