मांडा महेवा कलां गांव में बीते दो वर्ष पूर्व निर्मित शौचालय पहुंचे जर्जर अवस्था में

शौचालय अनुदान राशि मिलने से चार दर्जन परिवार हुए वंचित जबकि गांव हुआ ओडीएफ घोषितआधादर्जन लाभार्थियों को दी गई अधूरी अनुदान राशि

मांडा,प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। ब्लॉक अंतर्गत महेवा कला गांव में लाखों खर्च के बावजूद खुले में शौच जाने को ग्रामीण मजबूर ग्रामीणों ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत महेवा कलां गांव में बनवाए गए शौचालय के निर्माण में मानक की अनदेखी व अनुदान राशि वितरण में भारी धांधली किए जाने का आरोप लगाते हुए जिला प्रशासन से शिकायत की है। आरोप है की बीते वर्ष की गई शिकायत को वापस लेने के नाम पर शौचालय निर्माण हेतु अनुदान राशि देने का वायदा ग्राम सचिव द्वारा किया गया था। जिसके तहत आधा दर्जन शिकायतकर्ताओं को सीमेंट की बोरी व शौचालय शीट आदि आधाअधुर समान भी उपलब्ध कराया गया। जबकि बारिश व सीलन से सीमेंट खराब हो गई लेकिन ग्रामीणों को बाकी सामग्री व अनुदान राशि आजतक नही दी गई है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराते हुए अनुदान राशि दिलवाए जाने की मांग की है। महेवा कलां गांव के हीरालाल निषाद चंद्र मोहन मिश्रा उमाशंकर रविशंकर छोटू राजेंद्र प्रसाद गुलाब आदि ग्रामीणों का आरोप है की सरकार प्रत्येक गांव को खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए पानी की तरह रुपया बहा रही है। वहीं सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत व निर्माण कार्य मे मानक की अनदेखी सरकार का खुले में शौच बंद करने का सपना साकार होने में रोड़ा बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है की बीते दो वर्ष पहले उनके गांव में लगभग एक करोड़ रुपये से साढ़े छह सौ शौचालय का निर्माण कर कर गांव को ओडीएफ घोषित किया जा चुका है। बावजूद इसके गांव के चार दर्जन से अधिक गरीब परिवारों को आजतक शौचालय अनुदान नही दी गई और न ही शौचालय बनवाया गया। इसके विपरीत अनुदान राशि वितरण में नियम को ताख पर रख कर सरकारी नौकरी इनकम टैक्स दाता अविवाहित व्यक्तियों को व उनके परिवार के दो से तीन सदस्यों के नाम पर शौचालय बनवाने हेतु अनुदान राशि दे दी गई है। कुछ लाभार्थियों ने शौचालय मकान के दूसरे मंजिल पर भी निर्मित करा लिए है। वहीं ग्राम प्रधान व सचिव ने अनुदान राशि लाभार्थियों को देने के बजाए उनके शौचालय का निर्माण खुद कराया है। ग्राम पंचायत द्वारा निर्मित सैकड़ों शौचालय में मानक की जमकर अनदेखी की गई है। जिसके चलते बीते कुछ वर्षों में ही गांव के लगभग शौचालय ध्वस्त हो गए है। जिसको लेकर ग्रामीणों ने बीते वर्ष आलाधिकारियों से शिकायत की थी। शिकायत वापस लेने के नाम पर ग्राम विकास अधिकारी फूलचंद्र यादव ने अनुदान राशि देने की बात कही थी। जिसके तहत गांव के चंद्र मोहन मिश्रा को पांच बोरी सीमेंट व शौचालय सीट दरवाजा आदि उपलब्ध करा दिया गया था और आज तक ईट व मजदूरी का रुपया नही दिया गया। इसी तरह गांव के रविशंकर निषाद और मीना देवी को छह छह हजार का चेक दिया गया था जो बाउंस हो गया। इसके अलावा गांव के राजेन्द्र प्रसाद निषाद अतर गुलाब आदि ग्रामीणों को शौचालय बनवाने के बाद रुपये देने का वायदा ग्राम विकास अधिकारी ने किया था। सभी लोगों ने शौचालय बनवा चुके है लेकिन आज तक अनुदान राशि नही दी गई है। ग्रामीण आज भी खुले में शौच जाने को मजबूर है। मामले ग्राम विकास अधिकारी से वार्ता करने का प्रयास किया गया लेकिन मोबाइल स्विच ऑफ रहा। ग्राम प्रधान शिव कुमार सिन्हा ने बताया की अनियमितता का आरोप निराधार है। अधूरा समान देने व चेक वापस होने की बात पर कहा की शौचालय निर्माण हेतु कुछ समान दे दिया गया है। ईट का रेट अधिक होने के चलते अभी नही दिया गया है जल्द ही ईट आदि भी उपलब्ध करा दिया जाएगा। बाकी दो लाभार्थियों को छह छह हजार का चेक बीते दिन प्रदान किया गया है। मामले बीडीओ मांडा आरबी यादव ने बताया की पूरे मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी और अनुदान राशि मिलने से वंचित लाभार्थियों को सर्वे कराकर लाभ दिया जाएगा

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