
बाईलॉज व वकीलों के वरिष्ठता विवाद तय करने तक भूमिका सीमित: हाईकोर्ट
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार) । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि यूपी बार कौंसिल के चेयरमैन को किसी अधिवक्ता संघ की एल्डर कमेटी भंग करने या नई कमेटी बनाने का अधिकार नहीं है। बार कौंसिल की भूमिका अधिवक्ता संघ का बाई लॉज स्वीकृत करने और वकीलों की वरिष्ठता आदि के आपसी विवाद तय करने तक सीमित है। कौंसिल के चेयरमैन अधिवक्ता संघ के चुनाव को लेकर एल्डर कमेटी बनाने जैसे आदेश नहीं दे सकते। न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल एवं न्यायमूर्ति अजय भनोट की खंडपीठ ने यह निर्णय मेरठ बार एसोसिएशन की याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी व अन्य को सुनकर दिया है। सीनियर एडवोकेट अनूप त्रिवेदी का कहना था कि बार कौंसिल चेयरमैन ने एक शिकायत के आधार पर एल्डर कमेटी के सदस्यों लक्ष्मीकांत त्यागी व गोपाल कृष्ण चतुर्वेदी को इस आधार पर बाहर निकाल दिया कि वे नियमित वकालत नहीं कर रहे हैं। एक अन्य सदस्य ब्रह्मपाल सिंह को कारण बताए बगैर एल्डर कमेटी से बाहर कर दिया गया।
बार कौंसिल चेयरमैन ने 29 जून 2020 को नई एल्डर कमेटी गठित करके चुनाव कराने का निर्देश भी दे दिया, जो अवैधानिक है। नई एल्डर कमेटी ने चुनाव प्रक्रिया शुरू करते हुए 15 जुलाई, पांच अगस्त और 20 अगस्त को निर्णय लिए हैं जो अवैध हैं। याचिका में चेयरमैन के आदेश को रद्द करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने इस मुद्दे पर विचार करने के बाद कहा कि बार कौंसिल चेयरमैन को एल्डर कमेटी के काम में दखल का अधिकार नहीं है और न ही कमेटी भंग कर नई कमेटी बनाने का अधिकार है। कोर्ट ने बार कौंसिल चेयरमैन द्वारा गठित एल्डर कमेटी को अधिवक्ता संघ का चुनाव कराने व अन्य कार्यों में दखल देने के लिए अक्षम करार देते हुए पूर्व कार्यकारिणी द्वारा 14 मई 2019 को गठित एल्डर कमेटी को चुनाव संबंधी निर्णय लेने का आदेश दिया है। साथ ही कहा कि यदि चुनाव के संबंध में कोई विवाद होता है तो उसका निस्तारण सोसायटी रजिस्टेशन एक्ट के प्रावधानों के तहत किया जाए। कोर्ट ने मेरठ बार एसोसिएशन की पूर्व कमेटी ने अपना कार्यकाल समाप्त होने से एक माह पहले चुनाव के संबंध में लिए गए निर्णय को उचित करार देते हुए कहा कि इसमें कोई अवैधानिकता नहीं है।