हाथरस कांड: जिला प्रशासन का था अंतिम संस्कार का फैसला

( अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। बहुचर्चित हाथरस कांड को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में पक्ष रखा।

डीएम बोले, कानून व्यवस्था के मद्देनजर लिया गया यह निर्णय
पीडि़त पक्ष ने की किसी अन्य राज्य में मामला ट्रांसफर करने की मांग

हाथरस के जिलाधिकारी प्रवीन कुमार लक्षकार ने हाई कोर्ट में कहा कि रात्रि में ही मृतका के अंतिम संस्कार का फैसला जिला प्रशासन का था। कानून व्यवस्था के मद्देनजर यह फैसला लिया गया था। राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में कोई निर्देश नहीं दिए गए थे।

दूसरी ओर राज्य सरकार ने कोर्ट में पक्ष रखा कि इस मामले में कोई भी दुर्भावनापूर्ण निर्णय नहीं लिया गया।

कोर्ट ने सुनवाई पूरी होने के बाद चेंबर में लिखाने के लिए अपना आदेश सुरक्षित कर लिया है। साथ ही अगली सुनवाई के लिए दो नवंबर की तारीख मुकर्रर की है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने मामले का स्वत: संज्ञान लिया है और इसे गरिमापूर्ण ढंग से अंतिम संस्कार के अधिकार टाइटिल के तहत सूचीबद्ध किया गया है।

न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति राजन रॉय की खंडपीठ ने दोपहर दो बजकर बीस मिनट पर सुनवाई शुरू की।

कोर्ट में पीडि़त परिवार के साथ ही राज्य सरकार की ओर से अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी, पुलिस महानिदेशक व हाथरस के जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक पेश हुए।

परिवार की बिना मर्जी के अंतिम संस्कार के सवाल पर हाथरस के जिलाधिकारी ने पक्ष रखा कि 29 सितंबर को रात्रि 12.30 बजे शव गांव पहुंचा।

उस समय तक गांव के बाहर बड़ी संख्या में असामाजिक तत्व पहुंच चुके थे और हिंसा पर उतारू थे। शव की हालत भी लगातार बिगड़ती जा रही थी। स्थानीय स्तर की परिस्थितियों के कारण ही अंतिम संस्कार रात में ही कराने का फैसला लेना पड़ा।

हाईकोर्ट की ओर से इस मामले में नियुक्त न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता जेएन माथुर ने कहा कि परिवार की मर्जी के बिना और परंपराओं के विपरीत दाह संस्कार संविधान के अनुच्छेद-25 का उल्लंघन है और अपरिहार्य कारणों के लिए कुछ गाइडलाइन तय होनी चाहिए। अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही ने इस पर बचाव किया कि सरकार की नीयत साफ थी। इससे पहले अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी और पुलिस महानिदेशक हितेश चंद्र अवस्थी ने पक्ष रखा।

सुनवाई के अंत में कोर्ट ने पीडि़त परिवार से पूछा कि क्या उनका कोई वकील है। इस पर परिवार ने वकील सीमा कुशवाहा की ओर से इशारा कर दिया। उन्होंने परिवार की ओर से एक पत्र देकर कोर्ट से मांग की कि इस मामले को किसी अन्य राज्य में ट्रांसफर किया जाए, जांच होने तक सीबीआई सभी तथ्य गोपनीय रखे और परिवार को सुरक्षा मिले। अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही ने कहा कि परिवार के शपथपत्र में क्या कहा गया है, यह अभी संज्ञान में नहीं है। कोर्ट के आदेश का अध्ययन किया जाएगा। राज्य सरकार ने अपना पूरा पक्ष रखा है। युवती के परिवार ने भी अपना पक्ष रखा है।

एसआईटी करती रहेगी अपनी जांच, सीबीआई विवेचना

प्रयागराज। हाथरस कांड को लेकर सचिव गृह भगवान स्वरूप की अध्यक्षता में गठित एसआईटी जल्द अपनी जांच पूरी कर शासन को रिपोर्ट सौंपेगी। अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि एसआईटी को हाथरस में हुई घटना के पूर्व तथा एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस की भूमिका की जांच सौंपी गई है। एसआईटी अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी। एसआईटी की पहली रिपोर्ट के आधार पर ही हाथरस के एसपी विक्रांत वीर व तत्कालीन सीओ राम शब्द समेत पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया था। पूर्व डीजीपी बृजलाल का कहना है कि एसआईटी ने जांच की है, जबकि सीबीआई घटना की विवेचना करेगी। जांच और विवेचना दोनों अलग-अलग हैं। एसआईटी की जांच में पाई गईं कमियों व गलतियों पर संबंधित पुलिस अधिकारियों व कर्मियों के विरुद्ध शासन कार्रवाई कर सकता है, लेकिन उसकी जांच घटना की विवेचना का हिस्सा नहीं हो सकती। सीबीआई चाहेगी तो एसआईटी से उसकी जांच रिपोर्ट ले सकती है।

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