
( अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। मेरे पास अक्सर ऐसे लोगों के फोन कॉल आते हैं या वे रू ब रू भेंट करते हैं , वे ये जानना चाहते हैं कि क्या वोभी फ़िल्म अभिनेता बन सकते हैं । इन इच्छुक लोगों में से कई लोग ये भी जानना चाहते हैं कि क्या वे किसी एक्टिंग इंस्टिट्यूट/स्कूल में पढ़ाई कर के अभिनय सीख सकते हैं ? ।
मैं ऐसे लोगों से यही कहता हूं और दैनिक अनुराग के पाठकों से भी यही कहूंगा कि अभिनय कोई सीखने की चीज़ नहीं है ।
क्योंकि अभिनय की प्रतिभा व्यक्ति में जन्म से होती है । एक व्यक्ति जन्म से ही अच्छा या बुरा अभिनेता होता है ।
अभिनय किसी एक्टिंग अकेडमी, वर्क शॉप से बिल्कुल नहीं सीखा जा सकता । फ़िल्म एक्टिंग के नाम पर कई झूठे और फ्रॉड लोग अपनी अपनी दुकान चला रहे हैं, कोई एक्टिन्ग ट्रेनिंग संस्थान चला रहा है तो कोई ऑडिशन्स के नाम पर शोषण कर रहा है ।
और कुछ लोग एक्टिंग वर्क शॉप के नाम पर मोटी रकम ले रहा है। यदि आप अच्छे अभिनेता हैं तो सदा अच्छे रहेंगे और यदि आप खराब अभिनेता हैं तो हमेशा खराब ही रहेंगे । कोई स्कूल या अकादमी या वर्क शॉप आपको फिल्मी तकनीक का बुनियादी ज्ञान दे सकता है, थोड़ा सा आपको तराश सकता है किंतु एक अच्छा अभिनेता नहीं बना सकता, फ़िल्म या टीवी में नायक नहीं बना सकता । तो प्रश्न उठता है कि कैसे अच्छा अभिनेता बनकर बॉलीवुड या टेलीवुड में एंट्री लिया जा सकता है। मैं इच्छुक लोगों से कहना चाहूंगा के सबसे पहले स्वयं को अच्छी तरह से जांचे परखें,अपने वास्तविक शुभचिंतकों से खुलकर राय लें कि क्या आपके पास वो आवश्यक प्रतिभा है भी या नहीं ? यदि आप प्रतिभा सम्पन हैं तो इसके बाद भी अपने आप से पूछें कि आप क्यों अभिनेता बनना चाहतें हैं और आप डॉक्टर, इंजीनियर, पेंटर, कोई अधिकारी आदि क्यों नहीं बनना चाहते ? यदि आप वास्तव में केवल अभिनेता ही बनना चाहतें हैं, साथ ही प्रतिभा सम्पन्न हैं तभी अभिनय के क्षेत्र में भाग्य आज़माने के लिए अगला कदम उठाएं । ये अगला क़दम क्या होना चाहिए ? अब आप अपने शहर की किसी नाटक मण्डली से जुड़कर खूब सारे नाटकों में हिस्सा लें । मेरा मानना है कि रंग मंच ही एक मात्र स्थल है जोकि आप को तराश सकता है
रंग मंच के साथ साथ अपनी हिंदी,उर्दू,अंग्रेज़ी भाषा को बेहतरीन बनाएं । तीनों भाषा के शब्दों का सही उच्चारण सीखें ।रेडियो और एफ एम के कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर अपनी आवाज़ को बेहतर करें। अच्छे अभिनेताओं की फिल्में देखें । दिलीप कुमार, देवानंद, गुरुदत्त, राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन, नसीरुद्दीन शाह, कमल हासन, इरफान खान आदि के अभिनय की बारीकियों को देखें , जब आपको स्वयं पर संपूर्ण विश्वास हो जाये तभी टीवी सीरीज़ के ऑडिशन्स दीजिये । किन्तु ऑडीशन्स के नाम पर कोई फीस नहीं दें।टीवी सीरीज़ से कुछ सीखने के बाद फिल्म्स के ऑडिशन्स दीजिये । मैं वैसे तो बचपन से टीवी और आंचलिक फिल्मों में अभिनय कर रहा था । जो काम मिल रहा था बस करता जा रहा था किंतु सच बताऊं मैं सीरीयस नहीं था । एक बार देवानंद साहब ने कहा,”तनवीर तुम प्रोफेशनल अभिनेता क्यों नहीं बनते ?” देव साहब की बात मैने सिरियसली लिया और स्वयं का क्रिटिकल एनालिसिस किया और बहुत सोच समझकर अगला कदम बढ़ाया । मैंने फैसला किया कि मुझे केवल लीड रोल्स ही करना है। बैनर छोटा हो या बड़ा। मुझे सुपरस्टार्स के चमचे का रोल नहीं करना है।मैंने बॉलीवुड को बहुत करीब से देखा समझा । भाई भतीजावाद, यौन शोषण, रुपयों/पैसों की धोखाधड़ी सब अपनी आंखों से देखा और भुगता हालांकि खराब लोगों की संख्या बॉलीवुड में मात्र 1 प्रतिशत है फिरभी मैं कई धोखा खाया । और उन
धोखाधड़ी से बहुत कुछ सीखा
फिर फिल्में मिलीं, मैंने 18 वर्ष के अपने करियर में बस 12,13 फिल्म्स 25,30 टीवी सीरीज़ की किन्तु सभी लीडिंग एक्टर के तौर पर । आज मैं पूरी तरह से सन्तुष्ट नहीं भी हूँ किन्तु खुश हूं कि मुझे नाम , शोहरत और अच्छी फिल्म्स, टीवी सीरीज़ में अपनी प्रतिभा को साबित करने का अवसर मिला। आप में भी यदि अभिनय के गुण हैं और संघर्ष करने के लिए भी मानसिक रूप से तैयार हैं तो आप अपना पहला कदम फुल प्रूफ योजना के साथ रंगमंच की तरफ बढा सकते हैं।