
( अनंत पांडे ) प्रयागराज(अनुराग दर्शन समाचार)। रोशनी और सौभाग्य के महापर्व दीपावली के मौके पर दीयों का अलग ही महत्व है। मान्यता है कि मिट्टी का दीपक जलाने से शौर्य और पराक्रम में वृद्धि होती है और परिवार में सुख समृद्धि आती है। मगर महंगाई के चलते अब दीयों का चलन कम हो गया है। तेल की महंगाई ने लोगों का रुझान मोमबत्ती और बिजली की झालरों की ओर कर दिया। लेकिन इस बार चीनी सामानों का बहिष्कार होने से कौशांबी में भी अधिकतर लोगों ने मिट्टी के दीया से अपने घरों को रोशन करने का संकल्प लिया है। ऐसे में अबकी दीपावली में कुम्हारों को ज्यादा बिक्री की उम्मीद है।
सरसों के तेल से दीया जलाने से पर्यावरण स्वच्छ रहता है। सदियों से हिंदू समाज में प्रकाश के पर्व दीपावली पर मिट्टी के दीए से पूजने और सजाने की परंपरा रही है, लेकिन कुछ सालों से त्योहारों पर छाई आधुनिकता ने मिट्टी के दीयों की बिक्री को कम कर दिया है। बाजारों में चाइनीज झालरों, रंगीन मोमबत्तियों और टिमटिमाते बिजली के दीयों की खपत बढ़ी, तो कुम्हारों के चाक पर मिट्टी से आकार लेते दीयों का निर्माण घटता चला गया। हालांकि अब चाइनीज उत्पादों का बहिष्कार होने से दीपावली पर्व पर मिट्टी के दीपक की खपत बढ़ने की आस है।