वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सम्पन्न हुई गोवर्धन पूजा

 

भगवान को 56 प्रकार के व्यंजन का लगा भोग

स्वामी परमहंस आश्रम में हुई पूजा

( अनुराग शुक्ला ) अमेठी (अनुराग दर्शन समाचार)। दीपावली त्योहार के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा की परंपरा है। रविवार को स्वामी परम् हंस आश्रम में भी वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गोवर्धन पूजा विधि विधान से किया गया। पूजा सम्पन्न होने के बाद भोग के लिए बनवाये गए 56 प्रकार के व्यंजन का प्रसाद भी श्रद्धालुओं में वितरित किया गया।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार प्रकाशोत्सव के दूसरे दिन होने वाली गोवर्धन पूजा का भी विशेष महत्व है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण को 56 प्रकार के व्यंजन का भोग लगाया जाता है।

रविवार को स्वामी परम् हंस आश्रम के प्रबंधक स्वामी हरिचैतन्य ब्रह्मचारी जी महाराज ने वैदिक मंत्रोच्चार से गोवर्धन की पूजा की। भगवान श्रीकृष्ण को 56 प्रकार के व्यंजन का भोग लगाकर श्रद्धालुओं में प्रसाद का वितरण किया।

उन्होंने बताया कि कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि को गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाती है। बताया कि इसी दिन देवताओं के राजा इंद्र के क्रोध से गोकुलवासियों को बचाने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठा लिया था। इससे जहां गोकुलवासियों की रक्षा हुई वहीं देवताओं के राजा इंद्र के घमंड को भी चूर-चूर कर दिया। जान की रक्षा होने पर गोकुलवासियों ने प्रसन्न होकर गोवर्धन पर्वत की पूजा की और भगवान श्रीकृष्ण को 56 प्रकार के व्यंजन का भोग लगाया। तभी से यह परंपरा चली आ रही है और दीपावली के दूसरे दिन ही गोवर्धन की पूजा की जाती है।

उन्होंने महर्षि द्रोणाचल के पुत्र गोवर्धन पर्वत के पृथ्वी पर आने के ऋषि पुलत्स्य की पौराणिक कथा की भी जानकारी दी। बताया कि किस तरह गोवर्धन पर्वत को ऋषि पुलत्स्य काशी लाना चाहते थे लेकिन गोवर्धन पर्वत गोकुल के होकर रह गए। इस मौके पर हर्ष चैतन्य ब्रह्मचारी, वैदिक विद्वानों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

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