प्रिंटेड प्रोफार्मा पर सम्मन जारी करना अवैध

सीजेएम को नए सिरे से आदेश करने का निर्देश

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि पुलिस की चार्जशीट को संज्ञान में लेकर अभियुक्तों को सम्मन जारी करना एक गंभीर न्यायिक प्रक्रिया है। सम्मन जारी करने का आदेश भले ही विस्तृत न हो लेकिन उसमें न्यायिक विवेक का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। कोर्ट ने प्रिंटेड प्रोफार्मा के खाली स्थान भरकर सम्मन जारी करने की निंदा की और ऐसे सम्मन आदेश को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है। साथ ही सीजेएम हाथरस को विवेक का इस्तेमाल कर नए सिरे से आदेश करने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने विष्णु कुमार गुप्ता व अन्य की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। बीएसए की मिलीभगत से याची पर फर्जी बिल का भुगतान लेने के आरोप में जिलाधिकारी के निर्देश पर खंड शिक्षा अधिकारी रमनपुर हाथरस ने 12 सितम्बर 2017 को हाथरस गेट थाने में एफआईआर दर्ज कराई। याची पर तीन लाख 85 हजार 593 रुपये का फर्जी बिल भुगतान लेने का आरोप है। पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की, जिसपर सीजेएम ने 22 दिसम्बर 2018 को सम्मन जारी किया। सम्मन की वैधता को याचिका में चुनौती दी गई थी।

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