नहीं रहे कामरेड जियाउल हक सौ साल की उम्र में हुआ निधन

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। शहर के वरिष्ठतम नागरिकों में शुमार वामपंथी विचारक कॉमरेड जियाउल हक का रविवार को निधन हो गया। उन्होंने 28 सितंबर को अपना 100वां जन्मदिवस मनाया था। अपनों के बीच जिया भाई के नाम से मशहूर जियाउल हक पिछले कई महीनों से काफी अस्वस्थ थे। सिविल लाइंस के हेस्टिंग्स रोड स्थित आवास पर रविवार दोपहर उन्होंने अंतिम सांस ली। ईशा की नमाज के बाद राजापुर स्थित कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
शहर के दौंदीपुरी मोहल्ले में 28 सितंबर 1920 को जन्मे जिया भाई अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। तीन भाई बहन में वे सबसे बड़े थे। उनकी पत्नी डॉ. रेहाना बशीर का अक्टूबर में निधन हो गया था। उनके दो बेटे सोहेल अकबर और समीर अकबर हैं। समीर जामिया मिलिया में शिक्षक हैं और समीर अमेरिका के एक बैंक में नौकरी करते हैं। जिया भाई के न रहने का गम साथियों व संगठनों से जुड़े प्रियजनों को आहत कर गया। उनके निधन की जानकारी होने पर बड़ी संख्या में लोगों ने उनके आवास पर पहुंकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

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वतन छोड़कर नहीं गए पाक

प्रयागराज। जिया भाई के भाई और एक बहन पाकिस्तान में रहते हैं। उनके पिता जीमल हक पर भी पाकिस्तान जाने का दबाव पड़ा लेकिन वे नहीं गए। जिया भाई परिजनों से मिलने पाकिस्तान जाते रहे। 2005 में अंतिम बार भाई के बेटे की शादी में पाकिस्तान गए थे। जिया भाई ने अंग्रेजों की बर्बरता, आजादी की लड़ाई और देश के बंटवारे को भी देखा। वे एक कुशल संगठनकर्ता के साथ बतौर पत्रकार भी पहचान बनाई। जीआईसी से 12वीं करने के बाद 1940 में स्नातक किया। 1941-42 में कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े। आजादी के बाद 1948 में तीन महीने तक नैनी जेल में भी बंद रहे। न्यूज एज अखबार में बतौर विशेष संवाददाता के तौर पर देश-विदेश में रिपोर्टिंग की। रूस, वियतनाम, जर्मनी, क्यूबा की यात्राएं की।

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