धर्म डेस्क। चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को शीतला अष्टमी के रूप में मनाया जाता है।
इस पर्व में बासी भोजन किया जाता है, इसलिए किया जाता है कि इसे बसौड़ा के नाम से भी जाना जाता है।
शीतला माता की पूजा के दिन यानी शीतला अष्टमी को चूल्हा नहीं जलाने की परंपरा है इसलिए शीतला अष्टमी से 1 दिन पहले ही भोजन बनाकर रख लिया जाता है।
सर्वप्रथम में स्कंद पुराण में शीतला माता का महत्व बताया गया है जिस घर में चेचक से कोई बीमारी बीमारी हो उसे पूजा नहीं करना चाहिए।
साफ सफाई के महत्वपूर्ण दर्शाने के लिए शीतला माता के हाथ में Colors और सूप झाड़ू और नीम के पत्ते हैं इनका स्वरूप अत्यंत शीतल है और रोगों को हरने वाली है।
इसलिए इनकी पूजा के बारे में कहा जाता है यह निरोगी रहने का वरदान देती हैं।
घर में चेचक जैसे बीमारी हो तो इनकी पूजा नहीं करनी चाहिए घर में साफ सफाई विशेष ध्यान देना चाहिए नियमानुसार मां भगवती का पूजन होता है।
बासी भोजन करने से गर्मी के दिन चेचक जैसे बुखार जैसे ओड़िया खुशी तमाम बीमारियों से छुटकारा मिल जाता है और किसी प्रकार की बीमारी नहीं फैलती।