केन्द्र व राज्य सरकार पर लगाया हर्जाना

 

कई बार समय दिए जाने के बाद भी नहीं दिया हलफनामा

कोर्ट ने लगाया पांच हजार हर्जाना, दो हफ्ते में मांगा जवाब

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केन्द्र व राज्य सरकार और महानिबंधक कार्यालय हाईकोर्ट तथा कॉलेज की प्रबंध समिति को हर्जाना जमा करने शर्त पर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का समय देते हुए सख्त संदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल ने कई ऐसी याचिकाओं पर दिया है जिनमें कई बार समय दिए जाने के बाद भी जवाबी हलफनामा दाखिल नहीं किया गया। कोर्ट ने ब्रजेश की याचिका पर केंद्र सरकार को 26 अगस्त 2020 को जवाब दाखिल करने का समय दिया था। उसके बाद याचिका 29 सितम्बर, 19अक्टूबर व एक दिसम्बर 2020 को सूचीबद्ध हुई लेकिन जवाब दाखिल नहीं किया गया और केंद्र सरकार के अधिवक्ता भी उपस्थित नहीं थे। कोर्ट ने पांच हजार रुपये हर्जाना लगाया है और दो सप्ताह में जवाब मांगा है।
इंद्रजीत सिंह मामले में राज्य सरकार के स्थायी अधिवक्ता को 28 फरवरी 2020 को जवाब दाखिल करने का समय दिया गया।इसके बाद याचिका 17मार्च, 15जून, 27जुलाई, एक सितम्बर, एक अक्टूबर और एक दिसम्बर 2020 को सूचीबद्ध हुई लेकिन जवाब दाखिल नहीं किया गया। कोर्ट ने राज्य सरकार को 10 हजार रुपये हर्जाना जमा करने की शर्त पर दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है। यह भी कहा कि जवाब नहीं आया तो बिना जवाब के याचिका तय की जाएगी। साथ ही महानिबंधक हर्जाना राशि वसूल कर हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति में जमा कराएंगे।
इसी प्रकार अमरदीप कुमार मौर्य के केस में राज्य सरकार ने जवाब दाखिल कर दिया। याची ने प्रत्युत्तर हलफनामा दाखिल करने का समय मांगा। प्रबंध समिति से भी 12 दिसम्बर 2019 कोजवाब मांगा गया था। उसके बाद केस 14 फरवरी,24 सितंबर, 23 नवम्बर व एक दिसम्बर 2020 को सूचीबद्ध हुआ लेकिन जवाब नहीं आया। कोर्ट ने प्रबंध समिति को दो सप्ताह का समय दिया और 10 हजार रुपये हर्जाना जमा करने की शर्त लगाई है। यह भी कहा कि यदि जवाब नहीं आया तो जवाब दाखिल करने का अधिकार जब्त कर लिया जाएगा। महानिबंधक हर्जाना वसूल कर हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति में जमा कराएंगे।
ऐसी ही लालजी सोनकर की याचिका पर हाईकोर्ट महानिबंधक कार्यालय को संशोधित याचिका पर एक नवम्बर 2019 को जवाब देने का निर्देश दिया। इसके बाद याचिका 18 नवम्बर, 26 नवम्बर,11दिसम्बर व 19 दिसम्बर 2019, नौ जनवरी,27 जनवरी,13 फरवरी,24 फरवरी, आठ अक्टूबर व एक दिसम्बर 2020 को सूचीबद्ध की गई लेकिन जवाबी हलफनामा दाखिल नहीं किया गया। कोर्ट ने पांच हजार रुपये हर्जाना लगाया है और सात दिन में जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि जवाब दाखिल करने में देरी करने वाले अधिकारी से हर्जाना जमा कराया जाए। यदि जवाब नहीं दिया तो महानिबंधक आठ दिसम्बर को हाजिर हों।

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