धरनारत किसानों की मांग जायज नई कृषि नीति रद्द हो-उज्जवल रमण सिंह

ठंड में11वें दिन धरनारत किसानों को वार्ता के नाम पर लटकाया जा रहा है।

( अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव,विधायक उज्जवल रमण सिंह ने किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि केंद्र सरकार को किसानों की जायज मांग को तत्काल स्वीकार कर नई कृषि नीति को रद्द करना चाहिए इस ठंड में महिला, वृद्ध किसान 11दिन से सड़क पर पड़े हैं अपना काम धन्धा, घरद्वार छोड़ कर और केंद्र सरकार वार्ता के नाम से समय व्यतीत कर रही हैं या किसानों के सब्र का इम्तिहान ले रही हैं।उन्होंने कहा कि मोदी सरकार नोट बंदी, जीएसटी, लाकडाउन जैसे निर्णय तानाशाही तरीक़े से एक झटके से लिया तो 11दिन से धरना दे रहे किसानों से वार्ता का नाटक क्यों किया जा रहा हैं उन्होंने कहा कि पांच पांच बार किसान प्रतिनिधि और केंद्र सरकार के मंत्रीस्तर की वार्ता फेल हो गई हैं यह सिर्फ टाइम व्यतीत करने और किसानों को परेशान करने जैसा है।
विधायक ने कहा कि मोदी सरकार किसानों की आय दूगनी करने का जुमला दे रही हैं विगत पांच साल से पर पांच साल पहले पेट्रोल, डीजल, खाद,पानी, बिजली के दरों में दुगने का अन्तर पहले ही आ गया है बाकी आवारा पशुओं भी किसानों की मेहनत को चर रहे हैं।तो हकीकत में आय दुगुनी कहा होगी हा आकंड़ों की बाजीगरी मे इसको सिद्ध कर देगी सरकार।
विधायक ने कहा कि नई कृषि नीति से कांट्रेक्ट फार्मिंग को बढा़वा मिलेगा किसान खेतीहर मजदूर होकर रह जायेगा, दूसरा जमाखोरी को बढा़वा मिलेगा जिससें जनता को महंगी चीजें मिलेंगी इस लिए नई कृषि नीति को सरकार वापस ले और एमएसपी की गारंटी दे की सरकारी या प्राईवेट तय रेट से कम पर खरीदारी नहीं करेगा कृषि उत्पाद का।
पूर्व सपा प्रदेश प्रवक्ता विनय कुशवाहा ने किसान आंदोलन के आगे मोदी सरकार को झुकना ही पड़ेगा यह दांव उलटा पड़ गया हैं इसलिए वार्ता दर वार्ता का दौर चलाया जा रहा है कि समय निकले और इस विरोध को भी अवसर के तौर पर लेने के लिए एक दिन अचानक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी टीवी पर प्रकट होकर किसानों के हिमायती बनते हुए नई संशोधित बिल पेश करेंगे क्योंकि जैसे चाईनीज संकट के समय गलवान घाटी में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के जाने का प्रोग्राम फाइनल होकर उनकी जगह मोदीजी खुद गये क्योंकि पूरे विश्व की निगाह और मीडिया का फोकस उस संकट काल पर थीं इसी तरह किसानों और सरकार के बीच पहली वार्ता में भी राजनाथ सिंह के नेतृत्व में होनी थी लेकिन अचानक वो नहीं गये इससें सिद्ध होता हैं कि अब जल्दी ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी किसानों को संबोधित करेंगे एक और औपचारिक वार्ता के बाद।

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