गुरु परंपरा सनातन धर्म का मूल आधार- शंकराचार्य वासुदेवानंद

( अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। भारत राष्ट्र धर्म प्राण राष्ट्र है। गुरु ही धर्म व अधर्म के बीच का अंतर बताते हुए धर्म मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। गुरुजन ही निरपेक्ष निःस्वार्थ भाव से शिष्य को ज्ञान देकर अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का मार्ग बताते हैं।

नारायण से लेकर शुक्राचार्य और शंकराचार्य तक तथा उसके पश्चात भी आज तक गुरुओ का महातम्य है। उक्त बातें ज्योतिषपीठ के अपने पूर्व श्री मज्ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य ब्रह्मलीन गुरु आचार्य की स्मृति में आयोजित 9 दिवसीय आराधना महोत्सव में श्रीमज्ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज ने उपस्थित भक्तों को बताया।

गुरु ही नहीं बल्कि संपूर्ण गुरु परंपरा की। “नारायण समारंभां श्री शुक्राचार्य मध्यमाम, शंकराचार्य पर्यन्तां वंदे गुरु परंपराम्।।” श्लोक के माध्यम सृष्टि के आदि से ही चल रही गुरु परंपरा की स्वयं स्वामी जी ने भी वंदना किया। व्यास पीठ पर स्थापित ज्योतिष्पीठोध्दारक

जगतगुरु शंकराचार्य ब्रह्मलीन स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती, उनके शिष्य शंकराचार्य ज्योतिषपीठाधीश्वर ब्रह्मलीन स्वामी शांतानंद जी तथा उनके बाद पीठासीन ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी विष्णु देवानंद सरस्वती जी को माल्यार्पण किया। आराधना महोत्सव में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा में पधारें कथावाचक श्री स्वामी अखंडानंद सरस्वती जी महाराज के कृपा पात्र श्री स्वामी श्रवणान्द सरस्वती जी महाराज ने श्रीमद्भागवत महापुराण के नाम स्वरूप एवं महत्वपूर्ण कथा प्रसंगों का सरल एवं रोचक शैली में वर्णन करते हुए पधारे भक्तों को भावविभोर कर दिया। दंडी स्वामी विनोदानंद जी महाराज ने शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, श्रीमद्भागवत महापुराण कथा
व्यास स्वामी श्रवणान्द जी को माल्यार्पण कर आशीर्वाद प्राप्त किया। श्री मज्ज्योतिष्पीठ संस्कृत महाविद्यालय, श्री शंकराचार्य आश्रम, अलोपी बाग प्रयागराज के पूर्व प्रधानाचार्य पं०
शिवार्चन उपाध्याय शास्त्री, आचार्य पं० छोटेलाल मिश्र, आचार्य पंडित विपिन मिश्र, आचार्य पं० अभिषेक मिश्र एवं
मनीष जी ने आरती किया तथा पूज्य श्री मज्ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी
के सान्निध्य में संचालित भव्य अभिषेकात्मक (रुद्राभिषेक) ब्रह्मचारी वेदान्ताचार्य पं० विशुद्धान्द, ब्रह्मचारी
आत्मान्द, ब्रह्मचारी जितेन्द्रान्द सायं काल 7:00 से 9:00 बजे तक संपन्न हुआ और प्रसाद वितरित हुआ।

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