ठेठ ग्रामीण गीतों की कार्यशाला का शुभारंभ, बबबकेंद की अनूठी पहल

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र प्रयागराज द्वारा लगातार अपनी सफलतओं में नित नई कड़ी जोड़ता जा रहा है।

लोक कलाओं को न सिर्फ बचाने बल्कि उनको आज की युवा पीढ़ी से जोड़ने के लिए कार्यशालाओं का आयोजन एवं कला चैपाल आदि आयोजनो के माध्यम से केन्द्र लगातार ग्रामीण अंचल में पहुँच रहा है।

निदेशक इन्द्रजीत ग्रोवर ने अब कार्यशालाओं के स्वरूप में आमूल-चूल परिवर्तन करते हुए एक नई पहल की शुरूवात की है।

ग्रामीण अंचल में ही निवास कर रहे कलाकारों द्वारा शहरी परिवेश में रह रहे युवाओं में लोक के प्रति अनुराग जगाने के लिए कार्यशाला का आरम्भ किया है।

इसी क्रम में गांव में रह रही लोक गायिका मुरगुला देवी को मुख्य प्रशिक्षक बनाते हुए ‘‘लोक पर्व लोक स्वर’’ के अन्तर्गत पद्मश्री संगीत समिति अल्लापुर के संयुक्त तत्वावधान में कार्यशाला की शुरूआत की।

मुख्य प्रशिक्षक मुरगुला देवी, सहायक प्रशिक्षक अंजली भारद्वाज व केन्द्र के अधिकारी कृष्ण मोहन द्विवेदी ने सरस्वती व गणेश की प्रतिमा पर मल्यार्पण कर दीप प्रज्ज्वलन किया। निदेशक द्वारा शुरू की गयी इस अनूठी पहल पर प्रकाश डालते हुए कृष्ण मोहन द्विवेदी ने कहा कि ऐसी कार्यशाला से न सिर्फ शहरी परिवेश में बच्चों में लोकगीतों के प्रति रूचि विकसित होगी, बल्कि ठेठ गवई गीतों से भी उनका सरोकार बढ़ेगा।

यह कार्यशाला पूर्णतः निःशुल्क है जो कि आगामी 30 दिसम्बर तक चलेगी। कार्यशाला का आरम्भ मुरगुला देवी ने पारम्परिक पचरा गीत- ‘‘निमिया के डारि मईया, झुलेली झुलउवा हो कि झुमि-झुमि न’’ गा कर किया। इस दौरान केन्द्र से प्रभात कुमार पाण्डे, हिमानी रांवत, रवि शंकर गुप्ता आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम में विशेष सहयोग रोशन पाण्डेय का रहा।

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