श्रीमद् भागवतगीता से निकले अमृत को विद्वान पीते हैं- शंकराचार्य वासुदेवानंद

( अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार) l  शंकराचार्य मंदिर अलोपीबाग में नौ दिवसीय आराधना महोत्सव मैं अपने गीता जयंती एवं ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य ब्रह्मलीन स्वामी विष्णुदेवlनंद जयंती के अवसर पर बोलते हुए श्रीमद्ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने बताया कि परम पावन श्रीमद्भगवतगीता का बखान उपनिषदों में उस दूध देने वाली गाय के रूप में किया है जिसका दूध भगवान गोपाल नंदन श्री कृष्ण जी करते हैं और अर्जुन उसको पीने वाले बछड़े के समान हैं l अर्जुन और विगत जन उस दूध रूपी ज्ञान अमृत को पीते हैंl गीता के माध्यम से पूज्य शंकराचार्य जी ने बताया कि अपना धर्म अति उत्तम है, जिसमें मरना भी कल्याण कारक है और दूसरों का धर्म भय देने वाला है l पूज्य स्वामी शंकराचार्य जी अपने पूर्व शंकराचार्य श्रीमद् ज्योतिष पीठाधीश्वर ब्रह्मलीन स्वामी विष्णुदेवानंद जी की जयंती पर बताया कि 18 दिसंबर 1952 ईo को पीठधारक शंकराचार्य ब्रह्मलीन स्वामी ब्रह्मानंद जी को वसीयत के अनुसार ही स्वामी विष्णुदेवानंद सरस्वती जी ज्योतिषपीठाधीश्वर शंकराचार्य के पद नाम पर 28 फरवरी 1980 ईo पीठासीन हुए अपने संपूर्ण जीवन काल में 1 नवंबर 1989 ईo तक सनातन वैदिक धर्म का प्रचार ,प्रसार व संरक्षण किया l दिनांक 17 अप्रैल 1989 को उनके द्वारा लिखित पंजीकृत वसीयत के आधार पर 1 नवंबर 1989 को उनके ब्रह्मलीन होने 14/15 नवंबर 1989 ईo से मैं स्वयं श्रीमद् ज्योतिषपीठाधीश्वर नाम पद पर अभिव्यक्त पीठासीन होकर भगवान आदि शंकराचार्य के मंतव्य वह निर्देशों के अनुसार सनातन वैदिक धर्म का प्रचार प्रसार कर रहा हूं l आराधना महोत्सव में पधारे कथा व्यास स्वामी श्रवणlनंद जी ने गीत एवं संगीत के माध्यम अपने सरस कंठ व सहज भाषा में श्रीमद् भागवत कथा का रसपान भक्तों को कराया l दंडी संन्यासी स्वामी विनोदानंद जी ज्योतिष पीठ संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्रधानlचार्य पंडित श्रीवाचन उपाध्याय , आचार्य पंडित छोटे लाल मिश्रा, वेदांतlचार्य, विशुद्धानंद, सीताराम शर्मा, ब्रह्मचारी आत्मानंद, ब्रह्मचारी जितेंद्रlनंद, आचार्य विपिन मिश्रा, पंडित मनीष जी, अनु तिवारी एवं जगदीश प्रसाद मिश्रा आदि ने पूजा आरती भोग एवं प्रसाद वितरण में सहयोग किया l

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