
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। हिन्दुस्तानी एकेडेमी के तत्वावधान में शुक्रवार को पूर्वाहन भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म दिवस एवं सुशासन दिवस के अवसर पर ‘अटल बिहारी वाजपेयी ।
राजनेता और साहित्यकार विषयक संगोष्ठी का आयोजन गांची सभागार में किया गया। कार्यक्रम का प्रारम्भ माँ सरस्वती एवं अटल बिहार वाजपेयी की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
मंचासीन अतिथियों का स्वागत हिन्दुस्तानी एकेडेमी के अध्यक्षा डॉ. उदय प्रताप सिंह ने किया।उक्त समारोह की अध्यक्षता करते हुए डॉ. उदय प्रताप प्रताप सिंह ने कहा कि देश के महान विभूति भारत रत्ल पं0 अटल बिहारी वाजपेयी जी के साथ -साथ महामना मदन मोहन मालवीय जी का भी जन्म दिवस है। और आज की संगोष्ठी इसी उपलक्ष्य में हमने आयोजित की है। अटल जी कवि पहले थे बाद में राजनेता।
अगर यो राजनेता न होते तो वो बहुत बड़े साहित्यकार होते उन्होंने देश की जितनी सेवा की अगर वो पूर्ण रूप से साहित्य के माध्यम से देश की दशा और दिशा देते तो वो बड़ी सेवा होती। अध्यक्षीय उद्बोधन के पश्चात डॉ. उदय प्रताप सिंह ने हिन्दुस्तानी एकेडेगी के पुरस्कार योजना 2020 की भी घोषणा की जिसके माध्यम से विद्वानों एवं साहित्यकारों से आवेदन आमंत्रित किया गया है। आवेदन की विस्तृत जानकारी हिन्दुस्तानी एकेडेमी की बेवसाइट www.hindustaniacademy.com पर उपलब्ध है आवेदन की अन्तिम तिथि 25 जनवरी 2021 है। संगोष्ठी के सम्मानित पक्ता मणिपुर से आये प्रो. यशवंत सिंह ने कहा कि माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी एक सर्वसमावेशी राजनीतिज्ञ एवं प्रखर साहित्यकार थे। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से प्रारम में ही जुड़कर आपने कांग्रेस से इतर राजनीति की शुरूआत की तथा गैर कांग्रेसी प्रथम प्रधानमंत्री थे जिन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में पाँच वर्ष का कार्यकाल पूर्ण की। आप एक राष्टवादी कवि के रूप में भी प्रख्यात है। ऐसी हस्ती को में शत शत नमन करता हूँ। संगोष्ठी में सम्मानित वक्ता डॉ दुर्गा प्रसाद ओझा ने भारत रत्न सम्मान्य अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला और उनकी रचनाधर्मिता को रेखांकित करते हुए रचनाओं में ‘अटल जी के व्यक्तित्व का रूपायन किया। संगोष्ठी के सम्मानित वक्ता डॉ. दिनेश मणि त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय राजनीति के आदर्श प्रतिमान रहे राष्ट्र और समाजिक जीवन के लिये उनके द्वारा दिये गये योगदान को कमी भुलाया नहीं जा सकता है। श्रेष्ठ लेखक, पत्रकार एंव कवि के रूप में भी समाज का प्रबोधन किया। उनकी रचनाओं में हताशा, निराशा की जगह उत्साह का संचार होता है। भारत की राजनीति में जिन लोकतांत्रिक मूल्यों की अटल जी ने स्थापना की वह सभी के लिये पाथेय बन गया। संगोष्ठी में डॉ.
मुरारजी त्रिपाठी ने कहा कि अटल जी कुशल मूल्यों के प्रति समर्पित, वैचारिक प्रतिवद्धता वाले राजनेता एवं कालजयी कवि रचनाकार थे। राजनीति में उन्होंने जो आदर्श स्थापित किये वे पार्टी के लिये मार्गदर्शक सिद्धान्त बन गये। उनकी रचनायें लोगों में राष्ट्रभाव एवं ऊर्जा का संचार करने वाली है। आगरा से आयी। डॉ. अंजना सिंह सेंगर ने अटल जी को नमन करते हुए अटजी जी पर कविता पढ़ी सच्चे राष्ट्र पुजारी
तुझको शत शत नमन राजनीति-साहित्य धर्म के पोषक अटल बिहारी। शत् शत् नमन करती है. सच्चे राष्ट्र पुजारी।। तुम पर गर्व हिमालय करता सिंध सदा गुण गाता। करें म विस्मृत गंगा यमुना, हर्षित भारत माता।। है जन नायक तुम्हें न भूले. भारत के नर-नारी। शत् शत् नमन करती है. सच्चे राष्ट्र पुजारी।। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रमेश सिंह ने किया । कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन एकेडेगी की कोषाध्यक्ष पायल सिंह ने अटल जी कि कालजयी रचना ‘मौत से तन गयी पड़ी सन गई। मौत से तन गई। जुझाने का
इरादा न था मोड़ पवर मिलेंगे इसका वाया न था। रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई। यो लगा जिन्दगी से बड़ी हो गई। कार्यक्रम में उपस्थित विद्वानों में श्री रामनरेश तिवारी पिण्डीवासा’, डॉ. मानेन्द्र प्रताप
सिंह, प्रो. योगेन्द्र प्रताप सिंह, डॉ. अरुण त्रिपाठी, पियूष मिश्र पीयूष आदि के साथ शहर के अन्य
रचनाकार एवं शोध छात्र भी उपस्थित थे।