
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। सभी को एकता व भाईचारे का पाठ पढ़ाने वाले खाकचौक व्यवस्था समिति के संत अध्यक्ष पद के लिए अमर्यादित हो गए। संतों के बीच रविवार को जमकर झगड़ा हुआ।
अध्यक्ष पद के लिए भिड़े खाकचौक व्यवस्था समिति के संत
चला आरोप-प्रत्यारोप का दौर, आपस में जमकर गालीगलौज
इस दौरान एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला और जमकर गालीगलौज हुई। खाकचौक व्यवस्था समिति के प्रधानमंत्री संतोषदास ‘सतुआबाबाÓ ने आरोप लगाया है कि उन्हें लोहे की रॉड से मारने का प्रयास किया गया। इसकी तहरीर झूंसी थाने में दी गई है।
खाकचौक व्यवस्था समिति के पूर्व अध्यक्ष महामंडलेश्वर सीतारामदास को बर्खास्त कर उनकी जगह उपाध्यक्ष स्वामी जनमेजय को कार्यकारी उपाध्यक्ष बनाया था। शनिवार को इस घटनाक्रम के बाद दूसरा पक्ष खड़ा हुआ और उसने महामंडलेश्वर सीतारामदास के पद पर बने रहने का समर्थन किया। इस पूरे प्रकरण पर खाकचौक व्यवस्था समिति की बैठक रविवार को रामानंदाचार्य अ मार्ग पर विजयराम भक्तमाल आश्रम में हुई।
बैठक में सीताराम दास ने खुद को हटाने का विरोध किया। समिति का एक नियम है। नियम के अनुसार वो अध्यक्ष बने रहेंगे। उनके समर्थन में समिति के तमाम साधु संत हैं। इसी दौरान स्वामी जनमेजय ने नियम का हवाला देते हुए कहा कि नियमानुसार कार्यवाही न होने पर अध्यक्ष को हटाकर उपाध्यक्ष को कार्यकारी बनाने का समिति का संविधान है। आरोप है कि इसी दौरान संत आपस में भिड़ गए और एक दूसरे के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने लगे। जब व्यवस्था समिति के प्रधानमंत्री संतोष दास ‘सतुआ बाबाÓ ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो उनके साथ भी अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया।
प्रधानमंत्री संतोषदास ने आरोप लगाया कि महंत जयरामदास व अतुलदास ने उनके साथ अभद्रता की व स्टील की रॉड से उन्हें पीटने का प्रयास किया। इसी बीच उनके गनर व दूसरे साधु संतों ने उन्हें बचाया। पूरे प्रकरण के बाद संतों का दो धड़ा एक बार फिर सामने आया। प्रधानमंत्री संतोषदास ने मामले को लेकर झूंसी थाने में जयरामदास व अतुलदास के खिलाफ अभद्रता व मारने का प्रयास करने की तहरीर दी है।