
(अनुराग शुक्ला) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी के परम शिष्य आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ससंघ ( मुनि पियूष सागर एवं एलक पर्व सागर जी) भारतवर्ष के विभिन्न प्रदेशों की पदयात्रा करते हुए आज १६-फरवरी-२०२१ बसंत पंचमी के शुभ दिवस पर नगर आगमन जीरो रोड स्थित जैन मंदिर में हुआ।
जगह जगह श्रद्धालुओं ने आरती उतारकर स्वागत किया। २५ वर्षो बाद प्रयाग की धरती पर पुनः महाराज जी के आगमन पर जैन समाज की काफी संख्या में श्रद्धालु दर्शनार्थ एकत्रित हुए।
श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए मुनिश्री पियूष सागर ने प्रयाग की ऐतिहासिक महिमा के बारे में बताया। आचार्य श्री प्रसन्न सागर महाराज ने २५ वर्ष पहले आचार्य श्री पुष्पदंत सागर महाराज जी के सानिध्य में आयोजित भगवान् महावीर की भव्य जयंती उत्सव का संस्मरण कराया। उन्होंने बताया कि विश्व में आत्मा ही सबसे सुन्दर है और आत्मा से प्रेम करें । हर प्राणिमात्र में आत्मा होती है। यदि आप अपनी आत्मा से प्रेम करेंगे तो आप हर जीव से करुणा करेंगे। बृहस्पतवार,को आचार्य श्री के सानिध्य में तीर्थंकर ऋषभदेव तपस्थली तीर्थ, प्रयागराज की स्थापना के २० वर्ष पूर्ण होने के सुअवसर पर तपस्थली तीर्थछेत्र (अंदावा) में महामस्तकाभिषेक का भव्य कार्यक्रम आयोजित होगा। आचार्य श्री की अहिंसा पदयात्रा आगे सम्मेद शिखर जी तीर्थछेत्र (झारखण्ड) की ओर बढ़ेगी।