
( विनय मिश्रा) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। आज बसन्तपंचमी के पावन पर्व पर नगर के मध्य स्थित 109 वर्ष पुरानी सर्वाधिक प्राचीन शिक्षण संस्था में वागदेवी मां सरस्वती की अष्टधातु प्रतिमा का प्रकटोत्सव श्रीमज्ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानन्द सरस्वती जी महाराज के करकमलों द्वारा पूजन अर्चन के बाद सम्पन्न हुआ। प्रतिमा हिन्दी सेवक न्यायमूर्ति प्रेमशंकर गुप्त जी की स्मृति में श्री प्रदीप कुमार, वरिष्ठ अधिवक्ता, उच्चन्यायालय प्रयागराज द्वारा इस विद्यालय को मेंट की गयी।
अपने आर्शीवचन में जगद्गरू द्वारा अनेक विद्वतापूर्ण संस्मरण बताये गये। आपने कहा कि बिना धार्मिक सहजता के विद्यार्थियों का चरित्र निर्माण असम्भव है।
विद्यालयों में हमें पूर्व की भांति नैतिक शिक्षा देकर भारत को चरित्रवान बनाते रहना
चाहिए। स्वागत शिव कुमार वैश्य द्वारा किया गया। उन्होंने बताया कि महाराज जी अपने बाल्यकाल में इसी विद्यालय के छात्र रहे हैं। उन्होंने कठिन साधना के उपरान्त जगद्गरू का पद प्राप्त किया, जो हम सबके लिए अत्यन्त गौरव
की बात है। वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप कुमार ने विद्यालय में वागदेवी की मूर्ति स्थापना
बसन्तपंचमी के पर्व पर होने पर हार्दिक हर्ष व्यक्त किया।
न्यायामूर्ति श्री एस0पी0 केसरवानी ने विद्यालय से अपने परिवार के सम्बन्ध के संस्मरण याद कर अतीत के पन्नों पर अपने विचार व्यक्त किये। विद्यालय के प्रधानाचार्य संदीप सिंह राठौर ने अभिनन्दन पत्र पढ़कर जगद्गरूदीर्घ जीवन की कामना की।कार्यक्रम का संचालन विद्यालय के प्रबन्धक ओ0 पी0 गुप्त ने किया तथा सतीश चन्द्र केसरवानी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। समारोह में सर्वश्री विश्वनाथ प्रसाद गुप्ता, भूपेन्द्र नाथ केसरवानी, राजेश
केसरवानी, लक्ष्मण केसरवानी, विद्यालय के समस्त प्राचार्यगण, कर्मचारी एवं कोरोना
के दिशानिर्देश के अनुरूप विद्यालय के छात्र उपस्थित रहे।