भीषण मंहगाई में पेट्रोल और आग लगा रही हैं-कुंवर रेवती रमण सिंह

पेट्रोल-डीजल मूल्य निर्धारण अधिकार कम्पनी को देना बड़ी भूल।

पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाय।

( विनय मिश्रा )
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। राज्यसभा सांसद कुंवर रेवती रमण सिंह ने भीषण मंहगाई में भी रोज पेट्रोल-डीजल के मूल्य वृद्धि पर आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि छोटे छोटे पड़ोसी देशों में भी पेट्रोल, डीजल के दाम इतने नहीं है जितना भारत में हैं इसकी सिर्फ एक वजह है पेट्रोल -डीजल के मूल्य निर्धारण पर से सरकारी नियंत्रण हट कर कम्पनियों के हाथों में आ गया जिससे वो अपने लाभ को प्राथमिकता देते हुए मूल्य निर्धारित करते हैं उनका जनहित से क्या लेना देना।
सांसद ने कहा कि इसी तरह से जब नई कृषि कानून लागू होने के बाद पूंजीपति खाद्यान्न के दाम निर्धारित करेंगे जिसमें ना किसान को लाभ होगा और ना ही आमजनता को लाभ होगा।उन्होंने कहा कि पूंजीपति बड़े-बड़े गोदामों में वस्तुओं को संग्रहित कर अपनी आवश्यकता अनुसार डिमांड पर सप्लाई और मूल्य निर्धारित करेंगे ।
उन्होंने कहा कि आज देश तानाशाही और पूंजीवादी व्यवस्था मे जकड़ गया है जो लोकतंत्र के लिए शुभ नहीं है ।उन्होंने कहा कि भाजपा का दोहरा चरित्र हैं जब यूपीए सरकार मे पेट्रोल 60₹ प्रति लीटर था तो भाजपाई नेताओं को मंहगा लगता था आज 100₹ प्रति लीटर के करीब हैं तो देश हित में लगता हैं।क्योंकि भाजपा को जनहित से कोई मतलब नहीं होता हैं।
सांसद ने केंद्र सरकार से मांग किया कि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाय जिससें जनता को इस भीषण मंहगाई से राहत मिल सके क्योंकि पेट्रोलियम पदार्थों के मूल्य वृद्धि के साथ ही सभी वस्तुओं के लागत में वृद्धि होती हैं जो सीधा जनता पर असर करती हैं और सबसे ज्यादा असर गरीब, किसान, मजदूर और मध्य वर्ग पर पड़ता हैं।

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