शोध छात्र ने हॉस्टल में फांसी लगाकर जान दी, कहानी सुन कर आपको भी होगा दुख

इलाहाबाद : इलाहाबाद विश्वविद्यालय के एएन झा छात्रावास में रहने वाले शोध छात्र एसएस पाल (27) ने गुरुवार की रात फांसी लगाकर जान दे दी। हॉस्टल के कमरे में छात्र का शव फंदे से लटकता देख पुलिस को सूचना दी गई। कर्नलगंज पुलिस ने पहुंच शव को नीचे उतरवाया। पुलिस का कहना है कि छात्र काफी दिनों से डिप्रेशन में था। लंबे वक्त से उसका इलाज भी चल रहा था। वह आर्थिक तंगी की वजह से भी परेशान रहता था।

पश्चिम बंगाल का रहने वाला एसएस पाल एएन झा हॉस्टल के 106 नंबर कमरे में रहता था। साथी छात्र गुरुवार की रात उसके कमरे में पहुंचे तो पाल का शव फंदे से लटकता देख उनके होश उड़ गए। छात्र की मौत की खबर पाकर इविवि प्रशासन के अधिकारी पहुंच गए। खबर पाकर सीओ आलोक मिश्र और इंस्पेक्टर सत्येंद्र सिंह पहुंचे और शव को कब्जे में लेकर स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल भिजवाया। पुलिस के मुताबिक, छात्र के माता-पिता की मौत हो चुकी है। कमरे में सुसाइड नोट नहीं मिला है। सीओ के मुताबिक, साथी छात्रों ने बताया कि वह कई दिनों से ज्यादा परेशान था। उलझन में रहता था।

एमटेक का गोल्डमेडलिस्ट था एसएस पाल :

एसएस पाल ने मोती लाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान से अच्छी रैंक के साथ बीटेक किया था। बीटेक के बाद उसने जेके इंस्टीट्यूट से एमटेक किया। एमटेक में उसे गोल्ड मेडल हासिल किया था। मिलनसार, हंसमुख और छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय था वह। एएन झा के अधीक्षक डॉ. सुनीत द्विवेदी ने बताया कि एसएस पाल ने विश्वविद्यालय का क्रेट भी क्वालीफाई किया और प्रो. आरआर तिवारी के अंडर में वर्ष 2017 से शोध कर रहा था। वह मेरे पास अपनी शोध पर चर्चा के लिए अक्सर आया करता था। बात करता था। अपनी उपलब्धियों पर चर्चा करता था।

परिवार में कोई न होना था तनाव का कारण :

डॉ. सुनीत ने बताया कि वह मूलत: पश्चिम बंगाल का रहने वाला था। उसके परिवार में माता-पिता की पहले ही मौत हो चुकी है। बहनों ने उससे नाता तोड़ लिया था। विश्वविद्यालय की तरफ से बहनों से बात करने की भी कोशिश की गई थी पर उन्होंने कोई सपोर्ट करने से मना कर दिया था। कोई पारिवारिक सपोर्ट न होने के कारण वह तनाव में रहता था। इसका एसआरएन में मानसिक समस्या का इलाज भी चल रहा था। इधर वह काफी ठीक भी था। वह एएनझा के एनेक्सी भवन के कक्ष संख्या 103 में रहता था।

एक साल से नहीं दे पाया था हॉस्टल की फीस :

चीफ प्रॉक्टर प्रो. राम सेवक दुबे ने बताया कि एसएस पॉल आर्थिक रूप से काफी कमजोर था। परिवार में कोई सपोर्ट भी नहीं था। यही कारण है कि वह एक साल से छात्रावास की फीस भी नहीं दे पाया था। विश्वविद्यालय ने उसकी फीस माफ कर दी थी। उसे शोध कार्य के लिए प्रतिमाह आठ हजार रुपये मिलता था जिससे उसका काम चलता था।

दोस्त देते थे मेस की फीस :

डॉ. सुनीत द्विवेदी ने बताया कि वह अपनी मेधा और व्यवहार के बल पर छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय था। यही कारण था कि उसके दोस्त उसकी आर्थिक स्थिति को देखते हुए उसका काफी सपोर्ट करते थे। उसके मेस की फीस भी दोस्त ही भर दिया करते थे।

विश्वविद्यालय करेगा अंतिम संस्कार :

परिवार में किसी के न होने के कारण इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने शोध छात्र एसएस पाल का अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया है। चीफ प्राक्टर प्रो. रामसेवक दुबे ने बताया कि शुक्रवार की सुबह छात्र की डिटेल निकाली जाएगी। यह देखा जाएगा कि वह किस धर्म का है, उसी के अनुसार उसका अंतिम संस्कार कराया जाएगा।

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