इलाहाबाद। माँ कामाख्या संस्थान इलाहाबाद के स्वामी संकर्षण महराज ने कहा है कि आरक्षण के नाम पर देश और प्रदेश में जो राजनीति चल रही है ये देश के साथ ही साथ हमारे और आपके आस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
हम सबको मूर्ख बनाकर सत्ता के लोलुप कुर्सी हथियाना चाहते हैं,न तो किसी को बैकवर्ड के विकास से मतलब है,न तो फारवर्ड के सम्मान से मतलब है और न ही किसी को अल्पसंख्यक वर्ग के कल्याण तथा न ही अनुसूचित जाति-जनजाति के विकास से कोई मतलब है ,न तो किसी को राम मंदिर से ,न तो किसी को बाबरी मस्जिद न तो कृष्ण मंदिर और न तो कोई शिव मंदिर से लेना देना।
उन्होने कहा कि सत्य तो यही है कि हम सबकी भावनाओं को मनोवैज्ञानिक तरीके से कैश कराया जा रहा है । पूरा देश भ्रमित है और कोई भी राजनीतिक दल इस भ्रम को दूर नही कर पा रहा है,क्योंकि सबको अपनी वासना की तृप्ति करनी है ,किसी भी दल को आपकी समस्याओं से कुछ भी लेना-देना नही ,हम सबकी मजबूरी है इसी में रहना है । लेकिन इस मजबूरी को अगर ताकत बनाया जाए तो देश और देशवाशियों को कोई तकलीफ नही होगी ।
स्वामी जी ने कहा कि आज जिस तरह से हम सबकी उम्मीदें हिलोरें मार रहीं हैं,तरंगें उठ रहीं हैं उसके लिये हमें हीं सोंचना है कि अपनी उम्मीदों पर और देश के हित मे सोंचने वाले बुद्ध पुरषों या बौद्धिक लोगों को हमने उचित स्थान दिया है क्या ? सिर्फ सड़क बना देने से विकास नही हो जाता बल्कि देश हित मे नीति निर्धारण करने व सर्वांगीण विकास प्रत्येक इंसान की करने से भारत विकसित होगा । उन्होने कहा कि आज जिस तरह आरक्षण के नाम पर ठगी हो रही है।
इसमें सरकार का दोहरा चरित्र सामने आ रहा है, कहीं एक तरफ फारवर्ड को तुष्टीकरण की राजनीति तो बैकवर्ड और एस सी, एस टी की एकीकरण की राजनीति, दोनो ही वर्ग अपने हित मे सरकार और न्यायपालिका को देख रहा है, किन्तु होना कुछ नही है।
मारेंगें हम,मरेंगे हम ,बर्बाद होंगे हम,और सत्ता की कुर्सी पर विराजमान होकर अपना होने का झूठा स्वांग रचाएंगे वो । समय आ रहा है दल,जाति और वर्ग मत देखना,बल्कि अपना अमूल्य मत देते समय पवित्र सोंच से प्रत्याशी के अंदर देशप्रेम और देशवासियों के प्रति समर्पण भाव एवं व्यक्तित्व देखकर उसे अपना मताधिकार रुपी आशीर्वाद देना।
स्वामी संकर्षण महराज ने कहा कि बंधुओं जागो,समय है जगने का हमलोगों के प्रेम को छीना जा रहा है,न तो कोई फारवर्ड गलत है न ही बैकवर्ड और न ही एस सी,एस टी ।
गलत है अपनी सोंच, हम इन तथाकथित धूर्त नेताओं के चक्कर मे न आकर व्यक्तित्व की तलाश करें ,जो सिर्फ देश को एक सूत्र में बाँधने का कार्य करे,जो सम्यक हो,जिसकी दृष्टि सम्यक हो,जिसका प्रेम सम्यक हो । खुद की सोंच को बदलो और सभी आपके अपने हैं ,आपस मे प्रेम बनाओ,गले लगाओ,लड़ो मत,घृणा मत फैलाओ । जय माँ ।