कोरोना प्रोटोकाल के तहत हरिद्वार कुम्भ की व्यवस्था करे उत्तराखंड सरकार- शंकराचार्य

प्रयाग मेला व वृंदावन बैठक की तरह कुम्भ में आ रहे संतों का सम्मान करें मुख्यमंत्री। जगद्गुरु

( अनुराग शुक्ला ) हरिद्वार (अनुराग दर्शन समाचार)। गोवर्धन पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अधोक्षजानंद देवतीर्थ जी महाराज आज हरिद्वार पहुंचे और कुम्भ की अव्यवस्था देख बहुत चिंतित हुए। उन्होंने उत्तराखंड सरकार से कहा है कि उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित हुए माघ मेले और वृंदावन में चल रही वैरागी संतों की बैठक की तरह हरिद्वार कुम्भ में भी कोरोना प्रोटोकाल के तहत समुचित व्यवस्था होनी चाहिए।
जगद्गुरु शंकराचार्य ने कहा कि यह सत्य है कि कोरोना महामारी ने पूरे विश्व को प्रभावित किया है लेकिन इसके नाम पर साधु-संतों को पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों से रोका नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि साधु-संतो के तप और यज्ञ से राजा शक्तिशाली होता है। इसलिए शासन को चाहिए कि वह धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अनुकूल वातावरण बनाए। शंकराचार्य देवतीर्थ ने कहा कि कोरोना काल में ही उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोविड प्रोटोकाल के तहत प्रयागराज में भव्य माघ मेले का आयोजन सकुशल सम्पन्न करवाया। हरिद्वार कुम्भ से पहले वृंदावन में होने वाली परंपरागत वैरागी संतों की बैठक भी वह पूरी भव्यता के साथ सम्पन्न करवा रहे हैं। ऐसे में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को भी चाहिए कि वह कुम्भ में आए संतों को अतिथि मानते हुए उनका पूरा सम्मान करें और उन्हें समुचित व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दें। देवतीर्थ ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि कुम्भ का प्रथम शाही स्नान 11 मार्च को है । और इसके लिए हजारों साधु-संत हरिद्वार पहुंच चुके हैं ।लेकिन शासन व प्रशासन की तरफ से उनके लिए अभी तक कोई व्यवस्था नहीं की जा सकी है। नतीजतन तमाम संत और श्रद्धालु खुले आसमान के नीचे वर्षा, शीत और धूप में प्रवास करने को मजबूर हैं।
शंकराचार्य ने कहा कि कुम्भ का संयोग ग्रहों और नक्षत्रों के योग से बनता है। उसका संचालन राजाज्ञा से नहीं होता है। ऐसे में कुम्भ का आयोजन अपने निश्चित समय पर होगा और साधु-संत उस अवधि में अपना अनुष्ठान भी सम्पन्न करेंगे। ऐसे में यदि शासन-प्रशासन उन्हें समुचित व्यवस्था नहीं दे पाएगा तो इतिहास उन्हें माफ नहीं करेगा।
जगद्गुरु ने आज वैरागी कैंप और गौरी शंकर द्वीप समेत कुम्भ मेला क्षेत्र के कई स्थलों का भ्रमण भी किया। इस दौरान उनके साथ कई संत मौजूद रहे।

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