दहेज उत्पीडऩ के तहत मुकदमा चलाने का आदेश

आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने का अपराध नहीं दहेज की मांग

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ आत्महत्या के लिए विवश करने की धारा-306 का मुकदमा चलाने के लिए यह आवश्यक है कि आरोपित के कृत्य से खुदकुशी की गई हो। न्यायालय ने कहा कि दहेज मांगने के लिए दबाव डालने से आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने का अपराध नहीं बनता है। न्यायालय ने धारा-306 आईपीसी के तहत दर्ज चार्जशीट को रद करते हुए दहेज उत्पीडऩ के तहत मुकदमा चलाने का आदेश सीजेएम मेरठ को दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने आनंद सिंह व अन्य की याचिका पर दिया है। याची व उसके परिवार के लोगों के खिलाफ मेरठ के प्रतापपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। आरोप है कि उन्होंने जिस युवती से शादी तय की उसके परिवार वालों पर दहेज की रकम के लिए दबाव डाला था। इसकी वजह से युवती ने शादी से 15 दिन पूर्व खुद को आग लगा लिया जिससे उसकी मृत्यु हो गई।
पुलिस ने इस मामले में सभी आरोपितों के खिलाफ खुदकुशी के लिए प्रेरित करने की धारा में सीजेएम मेरठ की अदालत में आरोपपत्र प्रस्तुत किया। न्यायालय ने कहा कि याची व उसके परिवार वालों पर दहेज मांगने का आरोप यदि सही भी मान लिया जाय तब भी उन पर खुदकुशी के लिए उकसाने का कोई केस नहीं बनता है, क्योंकि किसी भी गवाह के बयान में ऐसा तथ्य नहीं आया है।

Exit mobile version