राम भारत वर्ष के चरित्र शील संयम और मर्यादा हैं- आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरी

( अनुराग शुक्ला ) हरिद्वार (अनुराग दर्शन समाचार )। महाकुंभ हरिद्वार 2021 के अंतर्गत भगवान महामृत्युंजय भगवान पारदेश्वर एवं भगवान दत्तात्रेय के आशीष अनुग्रह से अभिरक्षित श्री हरिहर आश्रम हरिद्वार में भगवान महामृत्युंजय के सारस्वत परिसर में आयोजित सांध्यकालीन प्रवचन सत्र में पूज्य आचार्य श्री जी ने साधकों को परात्पर ब्रह्म भगवान श्रीराम के दिव्य जीवन चरित्र पर अपना आशीष उद्बोधन प्रदान किया। पूज्य आचार्य श्री जी के अनुसार भगवान श्री राम भारत वर्ष के चरित्र ,शील -संयम और मर्यादा हैं। वो भारत की भोर का प्रथम स्वर हैं।भगवान श्री राम का चरित्र हनुमानजी के बिना पूर्ण नही होता ! श्री हनुमानजी परात्पर ब्रह्म भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त और आपातकाल में सबके सहायक हैं। भगवान श्री राम,सुग्रीव और विभीषण तीनों के निर्वासन काल में हनुमान जी ने ही सहायता की । उनका विग्रह देखिये तो वो संसार की ओर पीठ करके भगवान के पास बैठे हैं। वस्तुतःआत्म कल्याण के अभिलाषी जनों को भी संसार से ध्यान हटाकर परमात्मा की ओर ध्यान लगाना चाहिए।

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