
कहा, आपराधिक केस दर्ज होने मात्र से नियुक्ति निरस्त करना सही नहीं
( अनुराग शुक्ला )
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कांस्टेबल भर्ती 2013 के आवेदन में तथ्य न छिपाने के बावजूद आपराधिक केस दर्ज होने के कारण नियुक्ति निरस्त करने को सही नहीं माना और नियुक्ति अधिकारी को अवतार सिंह केस के दिशा निर्देश के तहत दो माह में याची की नियुक्ति पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी ने राहुल कुमार की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है।
याचिका पर अधिवक्ता आदर्श सिंह व अजीत कुमार सिंह ने बहस की। याची का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 3295 खाली पदों का चयन परिणाम घोषित हुआ, जिसमें याची भी सफल हुआ। उसे 15वीं वाहिनी पीएसी आगरा में कांस्टेबल पद पर नियुक्ति के लिए भेजा गया। लेकिन कमांडेंट ने यह कहते हुए उसकी नियुक्ति नहीं की कि उसके खिलाफ अलीगढ़ में आपराधिक मुकदमा दर्ज है, जिसमें चार्जशीट दाखिल हो चुकी है।
याची के अधिवक्ताओं का कहना था कि उसने अपराधिक केस छिपाया नहीं है और केस दर्ज होने मात्र से उसे नियुक्ति देने से इनकार नहीं किया जा सकता। अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता का कहना था कि याची के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। ऐसे में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। पवन कुमार के केस में तथ्य छिपाकर नौकरी प्राप्त की गई थी।इसलिए हस्तक्षेप नहीं किया गया लेकिन इस मामले में याची ने आवेदन में पूरी जानकारी दी है।नियुक्ति अधिकारी को सकारण विचार कर निर्णय लेना चाहिए। कोर्ट ने नियुक्ति से इनकार करने के आदेश को लिए जाने वाले निर्णय पर निर्भर करार दिया है।