पुलिस कांस्टेबलों की प्रोन्नति पर तीन माह में लें निर्णय

 

हेड कांस्टेबल पद पर पदोन्नति की मांग वाली याचिका पर सुनवाई

नियमावली: सात वर्ष की सेवा पूरी करने वाले मुख्य आरक्षी के पात्र

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। इलाहाबाद हाईकोर्ट की दो एकल पीठों ने पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड को प्रदेश के विभिन्न जिलों में तैनात पुलिस कांस्टेबलों को हेड कांस्टेबल पद पर पदोन्नत करने के संबंध में तीन माह के भीतर निर्णय लेकर उचित आदेश करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्र और न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी की एकल पीठों ने भीमराव, प्रिया गौतम, अजय कुमार सोनकर सहित सैकड़ों कांस्टेबलों की याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम को सुनकर दिया है ।
प्रदेश के मुरादाबाद, बरेली, हाथरस, गाजियाबाद, कानपुर नगर, वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज, मेरठ, गौतम बुद्ध नगर, आगरा व अलीगढ़ सहित एक दर्जन जिलों में तैनात पुलिस कांस्टेबलों ने याचिकाएं दाखिल कर हेड कांस्टेबल पद पर पदोन्नति दिए जाने की मांग की थी। इन कांस्टेबलों की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम का तर्क था कि 24 जुलाई 2019 को पुलिस हेडक्वार्टर ने वरिष्ठता सूची जारी की। इस सूची में 24 हजार 293 सिविल पुलिस एवं सशस्त्र पुलिस के आरक्षियों की भर्ती की तिथि को उनका बैच मानते हुए 31 दिसम्बर 2009 तक के भर्ती पुलिसकर्मियों की बैचवार अंतिम वरिष्ठता सूची जारी की गई। उसके बाद 30 दिसम्बर 2020 को 16 हजार 929 आरक्षियों को हेड कांस्टेबल के पद पर पदोन्नति प्रदान की गई लेकिन याचियों को प्रोन्नत नहीं किया गया जबकि याचियों का नाम वरिष्ठता सूची में काफी पहले है। वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि याचियों से सैकड़ों कनिष्ठ आरक्षियों को हेड कांस्टेबल पद पर पदोन्नति प्रदान कर दी गई है।
वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम का कहना था कि यूपी पुलिस आरक्षी तथा मुख्य आरक्षी सेवा नियमावली 2015 के नियम 5 व 17 में यह प्रावधान किया गया है कि जिन आरक्षियों ने सात वर्ष की सेवा आरक्षी पद पर प्रोबेशन पीरियड को शामिल करते हुए पूर्ण कर ली है, वे मुख्य आरक्षी पद पर पदोन्नति के लिए पात्र होंगे। याचिका में कहा गया था कि याची वर्ष 2005-06 बैच के वरिष्ठ आरक्षी हैं। उन्होंने सात वर्ष से अधिक की सेवा पूरी कर ली है। सभी याची पदोन्नति के हकदार हैं लेकिन अधिकारियों ने मनमानापूर्ण कार्य करते हुए याचियों से कनिष्ठ सैकड़ों आरक्षियों को हेड कांस्टेबल पद पर पदोन्नति प्रदान कर दी है। ऐसा करके याचियों के साथ सौतेला व्यवहार किया गया है एवं नियमों की अनदेखी की गई है।

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