हरसिंगार सारे झर गए…

हरसिंगार सारे झर गए
भूमि पर बिखर गए
गुड़हल भी भ्रमर स्पर्श कर गए भाव पुष्प समर्पित तुम्हें मां तन मन धन सब अर्पित मां चरणों में तेरे सिर झुका है और कहीं ना झुकने देना हम सब संतान तुम्हारी राहों को निष्कंटक कर देना

ज्योति श्रीवास्तव

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