
स्टेशनों पर नलों की संख्या कम होने से जमा हो रही है भारी भीड़।
( अनुराग शुक्ला )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। कोरोना संक्रमण काल में ट्रेन से सफर करने वाले प्यासे यात्रियों का धैर्य प्रयाराज स्टेशन पर गाड़ी के ठहरते ही टूट जाता है। जनरल कोचों से उतरने वाली भीड़ फिजिकल डिस्टेंसिंग को भूलकर गला तर करने के लिए वाटर बूथों की ओर दौड़ती है। एक-दो मिनट में वाटर बूथों पर भीड़ लग जाती है। धक्कामुक्की के दौरान कोविड नियम तार-तार हो जाते हैं। दरअसल, लंबी दूरी का सफर तय कर प्रयागराज जंक्शन पहुंचने वाली गाडिय़ों में यात्री अपनी प्यास बुझाने के लिए व्याकुल रहते हैं। ऐसे में वे धक्कामुक्की के बीच पानी की बोतलें भरने को मजबूर हैं। इनकी मजबूरी इसलिए भी है क्योंकि हर कोई 20 रुपये की मिनरल वाटर की बोतल खरीद नहीं सकता है। वाटर बूथों पर बोतल में पानी भरते वक्त ज्यादातर चेहरे पर मास्क भी नजर नहीं आता है। 05017 एलटीटी-गोरखपुर काशी एक्सप्रेस जंक्शन के प्लेटफार्म पर पहुंची तो पानी की बोतल भरने वालों की भीड़ गई है। कमोबेश यही हालात तुलसी, पवन, गोदान व कामायनी एक्सप्रेस समेत लंबी दूरी का सफर तय कर आने वाली सभी गाडिय़ों का है। कोविड नियमों का पालन कराना है तो टोटियों की संख्या बढ़ानी चाहिए। गर्मी में यात्री स्टेशन पहुंचते हैं तो उन्हें प्यास बुझाने से मतलब है।