
(अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। आस्था का केंद्र गंगा-यमुना और अदृश्य सरस्वती का पवित्र संगम भी कोरोना से हो रही मौतों से उदास है। कोरोना ने ऐसे हालात पैदा कर दिए हैं कि इन दिनों गंगा में स्नान करने वालों से अधिक अस्थि विसर्जन करने वालों की भीड़ लग रही है।
श्मशान घाटों पर शवों की कतार तो दूसरी तरफ गंगा में अपनों के मोक्ष की आस लिए परिजनों की भीड़।
एक तरफ श्मशान घाटों पर शवों की कतार तो दूसरी तरफ संगम पर अपनों के मोक्ष की आस लिए परिजनों की भीड़ देख हर किसी की आंखें नम हो रही हैं। तीर्थ पुरोहितों की मानें तो कोरोना से पहले आम दिनों में औसतन 100 अस्थि कलश संगम में विसर्जन के लिए आते थे। लेकिन पिछले तकरीबन एक महीने से 300-400 लोग अस्थियां लेकर पहुंच रहे हैं। सप्ताह में लॉकडाउन के दौरान 200 के आसपास तो अन्य दिनों में 300 से अधिक अस्थियां विसर्जन होने आ रही हैं। बड़ी संख्या में मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली से भी लोग पवित्र संगम में अस्थियां विसर्जन के निमित्त पहुंच रहे हैं। हालत यह है कि संक्रमण के डर से इतने तो नियमित स्नान करने वाले आस्थावान भी संगम तट पर नहीं पहुंच रहे हैं। सुबह में संगम के पास पार्किंग में गाड़ी खड़ी करने की जगह नहीं बच रही है। संगम का दृश्य पूरी तरह से बदल गया है। पहले जहां स्नान करने वालों की भीड़ उमड़ती थी। तो अब अस्थि विसर्जन के लिए सुबह से ही गाड़ियों की कतार लग रही है। यह सब देखकर मन बहुत दु:खी है। सामान्य दिनों में संगम पर तकरीबन 100 लोग देश के कोने-कोने से अस्थियां विसर्जन के लिए आते थे। अब यह संख्या 300-400 के पार पहुंच चुकी है। यजमान फोन पर पूछते हैं तो पुरोहित लॉकडाउन में आने से मना कर देते हैं।