डॉo त्रिपाठी ने संपूर्ण विश्व में भारतीय ज्ञान दर्शन का विस्तार किया – शंकराचार्य वासुदेवानंद

(अनुराग शुक्ला) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। भगवान राम के कर्म क्षेत्र कि चित्रकूट में जन्म लेकर धर्मनगरी प्रयागराज को अपना कर्म क्षेत्र बनाने वाले डॉo पंडित रामनरेश त्रिपाठी ने अपने जीवन के महत्वपूर्ण पचास वर्ष पत्रकारिता लेखन, सम्पादन एवं ज्योतिष की त्रिवेणी में गोते लगाते हुए संपूर्ण विश्व में भारतीय ज्ञान दर्शन का विस्तार व स्थापना किया। उनकी लेखनी, वाणी व सहज कवितत्व नई पीढ़ी को उक्त क्षेत्रों में सक्रिय एवं सफल रहने के लिए प्रेरित करता रहेगा । ” उक्त बातें श्रीमज्ज्योतिष्पिठाधीशवर जगतगुरु शंकरचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज ने डॉo रामनरेश त्रिपाठी स्वर्गीय होने के पश्चात श्री ब्रह्मनिवास अलोपीबाग भगवान शंकराचार्य परिसर में आयोजित शोक सभा में कहा । पूज्य शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी ने बताया कि स्वo पंडित रामनरेश त्रिपाठी ने भगवान आदि शंकराचार्य के जीवन व्रत पर महत्वपूर्ण ज्ञानवर्धक ग्रंथ सनातन समाज को दिया और अभी भी ज्योतिष्पीठ की रचना संरचना एवं गुरु परंपरा पर शोधपूर्ण लेखन की व्यस्तता उनकी दिनचर्या का प्रमुख अंश थी किंतु इसी बीच कोरोना महामारी से ग्रसित होकर उनका दुखद प्राणअंत हो गया जिससे मैं स्वयं एवं बुद्धिजीवी समाज दुखी है और ईश्वर से प्रार्थना है कि स्वर्गीय डॉक्टर रामनरेश त्रिपाठी को स्वर्ग में श्रेष्ठ स्थान दें और उनके पुत्र प्रिय शशांक त्रिपाठी सहित संपूर्ण स्वजनों को डॉक्टर त्रिपाठी से विलग होने का दुख सहन करने की क्षमता प्रदान करें।

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