मां तेरी बोली वेद ऋचाओं जैसी:

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। परम पिता ने जब संसार बनाया उन्हें माँ का खयाल आया उन्होंने सृष्टि का सृजन कर्ता माँ को बनाया
धरती को मिली जैसे
अम्बर की छाया
माँ वैसे ही तूने तेरी सन्तान के लिए आँचल फैलाया
माँ तूने तेरी सन्तान को जब बोलना सिखाया
कितने ही तक्षशिला और
नालंदा को मैंने तेरे कदमों में झुकते पाया
माँ तेरी बोली वेद ऋचाओं जैसी तेरी लोरी महाकाव्य कथाओं जैसी सपनेे सन्तान के हो जायें पूरे
माँ तूने अपने अनगिनत
सपनों को बिसराया
माँ के आँचल की महक से महक उठता जीवन
जैसे उपवन ने अपना सम्पूर्ण सुगंध फिजां मे फैलाया
(ज्योति श्रीवास्तव)

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