
( अनुराग शुक्ला )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में नियुक्ति पाने वालों का संकट टल गया है।
सिर्फ चयनित ही नहीं परीक्षा संस्था भी इस दौरान कटघरे में रही। वजह, लिखित परीक्षा में पूछे गए 150 सवालों में से 142 पर आपत्तियां हुई थीं। कोर्ट में यह विवाद एक साल चला और आखिरकार हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
कोर्ट ने अपने फैसले में तल्ख टिप्पणियां करके याचिकाकर्ताओं को भी असहज कर दिया वहीं, परीक्षा संस्था को भी आगे की परीक्षाओं में प्रश्नमाला तैयार करने में अधिक सतर्क रहना होगा।
उत्तर प्रदेश के परिषदीय स्कूलों की 69000 शिक्षक भर्ती उत्तीर्ण प्रतिशत और लिखित परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों के जवाब को लेकर विवाद होने से अब तक पूरी नहीं हो सकी है। कुल पदों में से करीब 64 हजार से अधिक चयनितों को दो चरण की काउंसिलिंग में नियुक्ति दी जा चुकी है।
अब रिक्त पदों के लिए तीसरे चरण की काउंसिलिंग कराने की तैयारी है।
इधर, लगभग हर परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों पर आपत्ति करने की मानों बाढ़ आ गई है। हर परीक्षा संस्थान को प्रश्नों का जवाब देने में जूझना पड़ रहा है।
विषय विशेषज्ञों की ओर से प्रश्नों के चयन पर भी सवाल उठ रहे हैं। शिक्षक भर्ती परीक्षा की उत्तरकुंजी आठ मई 2020 को जारी की गई थी।
करीब 20 हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने आपत्तियां की थीं। कोर्ट ने एक साल बाद याचिकाएं खारिज कर दी अन्यथा नियुक्ति पा चुके चयनित भी अधर में लटक जाते।