
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल प्रयागराज के पदाधिकारियों की वर्चुअल बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता प्रदेश उपाध्यक्ष महेंद्र गोयल जी ने किया।
बैठक में आदर्श व्यापार मंडल प्रयागराज अध्यक्ष शिव विशाल गुप्ता ने कहा कि अभी यह कहना तो संभव नही है कि लॉक डाउन कब तक चलेगा दुकाने प्रतिष्ठान कब तक बंद रहेंगे ? बाजार में सन्नाटा पसरा हुआ है।
और इस सन्नाटे के बीच दुकानदारों की दर्द भरी आहे साफ सुनाई दे रही है । बन्द पड़ी दुकान का किराया, कर्मचारियों का वेतन, बैंक से लिये कर्ज का ब्याज, बिजली का बिल आदि मिलाकर हर छोटे बड़ा दुकानदार को पचास हज़ार से एक लाख रुपये तक का प्रति महीना नुकसान हो रहा है।
वरिष्ठ उपाध्यक्ष अरुणेश जायसवाल जी ने कहा कि छोटे दुकानदारों का नुकसान छोटा हो सकता है मगर उनकी आर्थिक हालत छोटे नुकसान को बर्दास्त करने की हालत में भी नही है।
महामंत्री शुशांत गुप्ता ने कहा कि हमारी सरकार भली-भांति जानती है की व्यापारी वर्ग इस समय बेहद तनाव के दौर से गुजरा रहा है। बंद बड़ी दुकानों का खर्चा व्यापारियों की बर्दाश्त करने की शक्ति से बाहर निकल चुका है।
मगर अफसोस इस बात का है कि सहायता करना तो दूर की बात है , सहानुभूति के दो शब्द भी सरकार के पास व्यापारी वर्ग के लिए नहीं है। संगठन मंत्री प्रवीण अग्रवाल ने कहा कि बन्द पड़ी दुकानों को बिजली के बिल देना किसी बड़े जुल्म से कम नहीं है। जब व्यवसाय ही बंद पड़ा है तो ऐसे में व्यवसाय के लिए लिये गये ऋण पर ब्याज वसूलना भी व्यावहारिक नहीं है।
वर्षों से बैंक व्यापारियों से ब्याज के नाम पर बहुत कुछ कमा चुके हैं ऐसे में इस गंभीर स्थिति में ब्याज की छूट देने से बैंको पर कोई आफत आने वाली नहीं है।
बैंकों की बैलेंस शीट पर यदि नजर डाले तो दो बातें स्पष्ट होती हैं एक तो यह कि बैंकों की आर्थिक स्थिति बेहद मजबूत है और दूसरी बात यह स्पष्ट होती है कि मौजूदा हालातों में बैंक व्यापारियों को छूट ब्याज में छूट देने में सक्षम है।
मंत्री आलोक केशरवानी ने कहा कि इस महामारी के समय मे व्यापारी भाई अपनी अपनी दुकानों को बंद रखकर भी घर के खर्चे, स्कूलों के खर्चे, और कर्मचारियों के खर्चो को वहन कर रहे है।
सरकार को व्यापारी हितों को ध्यान में रखते हुए गृहकर, जलकर, और विधुत बिलो में कम से कम 3 माह के छूट का प्रावधान करना चाहिए, जिससे व्यापारी वर्ग को कुछ राहत मिल सके।
मगर अफसोस इस बात का है कि ना तो हमारी सरकार और ना ही बैंक वाले इतने संवेदनशील हैं कि वे व्यापारियों की मुश्किलों को समझ पाए। जब तक भूखा बच्चा रोता नहीं मां भी दूध नहीं देती ऐसे में जब तक व्यापारी संगठन अपनी इन मुश्किलों को सरकार और बैंक के सामने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत नहीं करेंगे तब तक कुछ भी होना संभव नहीं है।
उपाध्यक्ष रंजन केशरवानी ने कहाकि व्यापारी और टैक्स प्रोफेशनल सब कोविड से बचाव के लिए सरकार के आदेश पर अपनी दुकान बंद कर घर में बैठे है और सरकार द्वारा अभी तक GST की डेट को व्यापारियों की मांग पर अभी तक नहीं बढाई है।
वर्चुअल बैठक में महेंद्र गोयल, शिव विशाल गुप्ता, अरुणेश जायसवाल, शुशांत गुप्ता, आशीष केशरी, रंजन केशरवानी, प्रवीण अग्रवाल, वैभव केशरवानी, सुमित रस्तोगी, मनीष केशरवानी, अंकित रस्तोगी, आलोक केशरवानी, शरद सिंघल, संजीव गुप्ता, अविनाश केशरवानी, शंकर गुप्ता, विकास केशरवानी उपस्थित रहे।