
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि पर गुरुवार को पड़े सूर्य ग्रहण का प्रभाव भले नहीं था। न ही ग्रहण दिखाई पड़ा। इसके बावजूद लोगों ने ग्रहण की बंदिशों को नियमानुसार माना। ग्रहण काल दोपहर 1.43 से शाम 6.41 बजे तक मंदिरों का कपाट बंद रहे। ग्रहण खत्म होने पर धुलाई करके मंदिरों को खोला गया। घरों में लोगों ने सूतक मानते हुए खाने-पीने से परहेज किया। ग्रहण काल में आराध्य का स्मरण करते रहे। जबकि ग्रहण खत्म होने पर गंगा, यमुना के अलावा संगम के पवित्र जल में स्नान किया। सनातन धर्मावलंबियों ने स्नान करने के बाद यथासंभव दान-पुण्य किया। संगम तट पर स्नान-दान का सिलसिला रात तक चलता रहा।