
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार) । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सस्ते गल्ले की दुकान के आवंटन में ब्लॉक स्तर पर आरक्षण लागू करने के पांच अगस्त 2011 के शासनादेश के उपखंड ॥(1) व (2) को अनुच्छेद 14 व 15 के विपरीत बताते हुए इसकी संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि शासनादेश में साफ कहा गया है कि विकास खंड को इकाई मानकर तहसील स्तरीय समिति आरक्षण की गणना करेगी। दुकान रिक्त होने पर ही आरक्षण लागू होगा। दुकानदार का लाइसेंस रद्द नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि दुकान जिस वर्ग के लिए आरक्षित होगी, खाली होने पर उसे आवंटित की जाएगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केशरवानी एवं न्यायमूर्ति आरएन तिलहरी की खंडपीठ ने कुशीनगर में गुलरिया गांव के अखिलेश तिवारी की याचिका पर दिया है। याची का कहना था कि गुलरिया गांव की सस्ते गल्ले की दुकान आरक्षित थी। 26 जुलाई 2019 को लाइसेंस निरस्त होने से दुकान खाली हुई, इसलिए सामान्य वर्ग को मिलनी चाहिए। शासनादेश के तहत यह दुकान अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित घोषित है। 29 जुलाई 2019 के एसडीएम के पत्र के अनुसार 92 दुकानों में से 25 एससी/एसटी और 50 ओबीसी की हैं। 75 दुकान आरक्षित श्रेणी की हैं, जो कोटे से काफी अधिक हैं इसलिए गुलरिया की दुकान सामान्य वर्ग को दी जानी चाहिए। 13 नवंबर 2019 को दुकान का अनुसूचित जाति वर्ग को हुआ आवंटन रद्द किया जाए।