
(अनुराग शुक्ला )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि विश्वास ही नहीं होता कि मथुरा में दो कमरे व बाउंड्री को अवैध निर्माण मानकर ध्वस्त किया जाए और इसकी खबर वहां के डीएम व एसडीएम सदर को न रही हो। कोर्ट ने कहा कि ध्वस्तीकरण पर रोक के बावजूद निर्माण ढहाने की जवाबदेही अवमानना आरोप निर्मित कर ही तय हो सकेगी। इसी के साथ कोर्ट ने दोनों अधिकारियों के बचाव को अस्वीकार कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि पहले दीवानी अदालत की डिक्री व हाईकोर्ट के आदेश की जानबूझकर अवहेलना की। जब गर्दन फंसती दिखी तो डीएम व एसडीएम ने गलती का ठीकरा अदने से अधिकारी सर्वे कानूनगो नागेंद्र नाथ चौबे पर फोड़ दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने विशाल शर्मा की अवमानना याचिका पर दिया है। कोर्ट ने मथुरा के डीएम नवनीत सिंह चहल, एसडीएम सदर क्रांति शेखर सिंह, सहायक नगर आयुक्त एसके तिवारी एवं सीओ सदर गौरव त्रिपाठी को कारण बताओ नोटिस जारी कर सभी को 16 जुलाई को हाजिर होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सभी अधिकारियों से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है कि आदेश की जानबूझकर अवहेलना करने पर क्यों न उनके खिलाफ अवमानना का आरोप निर्मित किया जाए। मामले के तथ्यों के अनुसार विवादित स्थल को लेकर याची के पक्ष में दीवानी अदालत की डिक्री है। इसके बावजूद अवैध निर्माण मानकर ध्वस्तीकरण करना चाहा तो हाईकोर्ट ने रोक लगा दी। फिर भी निर्माण गिरा दिया गया। कोर्ट ने सरकारी वकील से इस बारे में जानकारी मांगी तो डीएम व एसडीएम ने यह कहकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की कि कार्रवाई सर्वे कानूनगो ने स्वयं खड़े होकर कराई है। वही आदेश की अवहेलना का जवाबदेह है, वे दोनों नहीं हैं। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी मान रहे हैं कि आदेश की अवहेलना की गई है लेकिन उन्होंने नहीं की।