
( अनुराग शुक्ला )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। दिलीप कुमार एवं श्री मती सुनीता देवी ट्रिपल आई टी ,नियर केंद्रीय विद्यालय ,झलवा निवासी इलाहाबाद की पुत्री पूजा चौधरी जी को नृत्य सीखने का बचपन से ही मन था और वह बाल्यकाल से ही फिल्मी संगीत ,लोग गीत आदि पर हूबहू नृत्य करती रहती थी। उनकी इस प्रतिभा से प्रभावित पड़ोस के कुछ लोगो ने पिता दिलीप कुमार जी से उन्हें नृत्य की शिक्षा दिलाने की बात कही कि यदि वह सीखे तो आगे बहुत अच्छा कर सकती है और तभी कुमारी पूजा का प्रवेश प्रयाग संगीत समिति रामबाग में स्थित है। वहां हुआ और बृजमोहन भट्ट जी के नेतृत्व में शिक्षा आरंभ हुई ६ वर्ष के बाद कुमारी पूजा गुरु उर्मिला शर्मा जी के यहां नृत्य सीखने एवं अपने नृत्य को और निखारने लगी । गुरु उर्मिला शर्मा जी ने भी उनको उच्च तालीम दी । तत्पश्चात् कुमारी पूजा नृत्य की आगे की शिक्षा पूर्ण करने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय गई और वहां से प्रोफेसर रंजना श्रीवास्तव एवं डॉ विधि नागर जी के सानिध्य में मास्टर ऑफ कथक नृत्य की डिग्री प्राप्त कर पीएचडी की ओर कदम बढ़ाया और प्रोफेसर पंडित ओम् प्रकाश मिश्रा के नेतृत्व में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की।कुमारी पूजा चौधरी से डॉ पूजा चौधरी बनने का सफर बहुत ही मुश्किल आर्थिक ,सामाजिक परेशानियों को झेलते हुए रहा क्युकी डॉ पूजा चौधरी जी के पिता पेशे से दर्जी (टेलर ) का कार्य करते है और माता गृहिणी है ।ऐसे में बाहर रहकर पढ़ाई करना कुछ असंभव सा था किन्तु डॅा पूजा के हौसले ने हार नहीं मानी और आज वो इलाहाबाद की पहली लड़की है जिन्होंने नृत्य विषय में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है जो इलाहाबाद के लिए गौरव की बात है । डा पूजा चौधरी जी ने मात्र २६ वर्ष की आयु में ही यह कार्य किया और साथ ही बहुत ही अच्छी कथक नृत्यांगना है देश में इलाहाबाद बनारस लखनऊ बिहार बिलासपुर धनबाद आदि अलग -अलग स्थानों सहित मालदीव्स में भी अपने गुरु उर्मिला शर्मा जी के सानिध्य में नृत्य की प्रस्तुति दे चुकी हैं ।लगभग २५० से ४०० स्टेज परॉर्मेंसेस दे चुकी हैं। डॉ पूजा पंजाब में सैक्रेड हार्ट कॉलेज ऑफ डांस में लेक्चरर के पद पर कार्यरत थी साथ ही धनबाद में बिनोद बिहारी महतो कियेलांचल यूनिवर्सिटी में नृत्य शिक्षिका के पद पर भी कार्य किया है ।वर्तमान में ऑनलाइन डांस क्लास के माध्यम से पंजाब दिल्ली गाजियाबाद,बेगलूर , इलाहाबाद आदि स्थानों से सम्मिलित बच्चो को कथक नृत्य की शिक्षा दे रही हैं। आप अब तक सैकड़ों बच्चो को शिक्षा दे चुकी है । पूजा चौधरी सदैव अपने माता पिता एवं गुरु उर्मिला शर्मा की कृतज्ञ है कि उन्होंने हमेशा उनका साथ दिया । आपके भाई सूर्यकांत चौधरी जो की बहुत ही अच्छे वायलिन वादक है और देश में विभिन्न स्थानों पर अपने वादन का प्रदर्शन करते रहते है ।पूजा जी बताती हैं कि जब वह छोटी थी तब उन्होंने कभी ये नही सोचा था कि वह इस क्षेत्र में यहां तक बढ़ पाएंगी, पर कहते है न “जहां चाह वहां राह” ।पूजा जी ने प्रदेश स्तर (state Level) की प्रतियोगिता में युवा वर्ग 2015 में संगीत नाटक अकादमी लखनऊ द्वारा प्रथम स्थान भी प्राप्त किया है। डॉ पूजा सरकार से अनुरोध करती हैं की कथक नृत्य जो की अपने में एक सम्पूर्ण विषय है और जिसकी जन्म भूमि इलाहाबाद के हंडिया जिले की किचकिला गांव है तो यहां पर भी यूनिवर्सिटी एवं कॉलेज में इस विधा के शिक्षण की व्यवस्था की जानी चाहिए जिससे इस विषय में भी लोग सीखने की ओर कदम बढ़ाए क्युकी यह एक मात्र शास्त्रीय नृत्य हैं जो पूरे उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर है जिसे हम सभी को संजोना है ।पूजा जी बताती है की उनके पति योगेश कुमार एवं सासू मां ससुर जी भी उनकी विधा को समझते है और आगे बढ़ने को प्रेरित करते है । आज अन्य विषयों की भाती ही इस विधा में भी असिस्टेंट प्रोफेसर, प्रोफेसर के पद पर कार्य किया जा सकता है किंतु सरकार को इसके लिए देश के सभी विद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में वेकैंसी निकलनी चाहिए।