Roaster Scam: भ्रष्टाचार व जुगाड़ का किस्सा है NCR का रोस्टर घोटाला

(अनुराग शुक्ला) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल के स्टेशनों पर टिकट चेकिंग स्टाॅफ के रोस्टर में भ्रष्टाचार की कड़ियां धीरे-धीरे वाणिज्य विभाग की परतों को उघाड़ रही हैं।

जांच अधिकारी मुख्यालय के अफसर से प्रभावित दोनों एक “गुट” के माने जाते हैं यही नहीं,जांच पर भी है संदेह

चर्चा है कि भ्रष्टाचार की इस कहानी में एक महिला “मैडम” का अहम रोल सामने आ रहा है। जो रोस्टर की आमदनी का वारा-न्यारा करती रही हैं।

रोस्टर भ्रष्टाचार का यह खेल प्रयागराज जंक्शन पर ही नहीं, कानपुर, झांसी और आगरा स्टेशनों के रोस्टर में भी प्रयागराज जैसा भ्रष्टाचार है। रोस्टर भ्रष्टाचार के इस खुलासे के पीछे भी अफसरों का लेनदेन है।

इसमें व्यवधान आने पर एक दूसरे के खिलाफ गैरों से थोक में शिकायतें कराई जा रही है। प्रयागराज जंक्शन के रोस्टर और कोरोना महामारी के दौरान टिकट चेकिंग स्टाॅफ की ड्यूटी में गड़बड़ी का मुद्दा प्रिंट मीडिया में छाया हुआ है।

प्रकरण में प्रयागराज जंक्शन पर रोस्टर इंचार्ज वाले सीआईटी को निलंबित किया जा चुका है। साथ ही इसकी जांच सीनियर डीसीएम-2 कर रहे हैं।

रेलवे सूत्रों का दावा है कि रोस्टर भ्रष्टाचार एक छोटा मामला है। दरअसल, बड़े रेलवे स्टेशनों से होने वाली अवैध कमाई के स्रोतों पर कब्जे के लिए एनसीआर मुख्यालय में तैनात एक मुख्य वाणिज्य प्रबंधक की कारीगरी है।

उनकी ही रणनीति से डिवीजन में सीनियर डीसीएम के अधिकार वाले रोस्टर ड्यूटी और उसकी आमदनी पर “मोहरा” बैठा दिया। ऐसे ही “मोहरे” कानपुर, झांसी और आगरा स्टेशनों पर भी पदस्थ हैं और अपना “काम” पूरी “निष्ठा” से कर रहे हैं। यह कारीगरी सिर्फ कर्मचारियों की ड्यूटी तक ही सीमित नहीं है।

कामर्शियल विभाग के कई डिवीजनल कार्यों में सेंधमारी है। बताते हैं कि रोस्टर इंचार्ज की नियुक्ति डिवीजन को करनी चाहिए। पहले ऐसा चल भी रहा था।

परंतु, सीसीएम ने व्यवस्था परिवर्तन कर “अपने” लोगों को फिट कर दिया। इस बदलाव से टिकट चेकिंग स्टाॅफ के जरिए होने वाली आमदनी डिवीजन पहुंचने के बजाए सीधे मुख्यालय वाले अफसर तक पहुंचने लगी। रकम पहुंचने वाले मैडम तक पैकेट पहुंचाकर खुश रहते और रखते हैं।

चर्चा यह भी है कि प्रयागराज जंक्शन के रोस्टर इंचार्ज ने नगदी के बजाय डिजिटल ट्रांजेक्शन को पसंद किया। परिजनों के खाते में पहुंची रकम दूसरे स्रीतों से पहुंचाई गई।

जांच पर भी है संदेह

रेलवे में चर्चा है कि प्रकरण के जांच अधिकारी मुख्यालय के अफसर से प्रभावित हैं। दोनों एक “गुट” के माने जाते हैं। यही नहीं, डिवीजन से लेकर मुख्यालय तक प्रयागराज डिवीजन के दोनों सीनियर डीसीएम के बीच खुली ‘जंग’ से सभी वाकिफ हैं। बताते हैं कि करीब छह महीने पहले दोनों सीनियर डीसीएम किसी मामले में तत्कालीन महाप्रबंधक तक ‘पंचायत’ लेकर पहुंच चुके थे। ऐसे में एक अफसर की जांच प्रतिद्वंद्वी अफसर और उनकी पसंद वाले कर्मचारियों के लिए मुसीबत खड़ी कर सकते हैं। विभागीय अफसरों का मानना है कि न्यायहित में वाणिज्य विभाग से बाहर के किसी विभागाध्यक्ष स्तर के अफसर से जांच कराने पर किसी के साथ अन्याय नहीं होगा।

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