पुलिस विफल तो दूसरी एजेंसी से क्यों नहीं कराते जांच

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत झांसी में 1600 करोड़ रुपये के घोटाले पर राज्य सरकार को 24 अगस्त तक का अतिरिक्त समय दिया है।

 

बिजली योजना में घोटाला मामले में हाईकोर्ट ने की तल्ख टिप्पणी

 

पूछा है कि विवेचना पूरी करने में देरी क्यों की जा रही है। ऐसा क्या है, जिसकी वजह से भ्रष्टाचार के आरोपित अधिकारियों को गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है। कोर्ट ने कहा है कि यदि संसाधनों की कमी के कारण संबंधित थाने की पुलिस विवेचना नहीं कर पा रही है तो सरकार दूसरी जांच एजेंसी को विवेचना क्यों नहीं स्थानांतरित कर देती। यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एमएन भंडारी तथा न्यायमूर्ति एससी शर्मा की खंडपीठ ने गिरराज सिंह की जनहित याचिका पर दिया है। याचिका पर अधिवक्ता एससी दुबे ने बहस की। कोर्ट ने अपर शासकीय अधिवक्ता एसए मुर्तजा की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए समय की मांग स्वीकार करते हुए 24 अगस्त तक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इससे पहले राज्य सरकार से पूछा गया था कि अब तक क्या तथ्य इकट्ठा किए गए हैं। यदि आरोपित अधिकारी जमानत पर नहीं हैं तो क्या उन्हेंं गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी नहीं किए जाने के क्या कारण हैैं।

याची का कहना है कि मेसर्स आइवीआरसीएल इंफ्रास्ट्रक्चर एंड प्रोजेक्ट लिमिटेड हैदराबाद व बिजली विभाग के अभियंताओं की मिलीभगत से करोड़ों रुपये का भुगतान बिना काम कराए लिया गया है। राज्य सरकार के निर्देश पर एफआईआर दर्ज कराई गई है। जांच बिजिलेंस विभाग कर रहा है। प्रकरण में पांच जुलाई 2019 को थाना नवाबाद झांसी में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। याची का कहना है कि वित्त वर्ष 2005-6 में योजना के तहत 144 गावों के विद्युतीकरण का ठेका हैदराबाद की कंपनी को दिया गया। इस दौरान 9505 पोल में से 50 फीसद मानक के अनुरूप नहीं लगाए गए। झांसी के 23 गांवों का मुआयना किया गया, जिसमें 87 फीसद इलेक्ट्रिक मीटर, बाक्स फिटिंग नहीं मिली। बिजली विभाग के आधा दर्जन आरोपित अभियंताओं को भी पक्षकार बनाया गया है।

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