
(अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। नाग पंचमी के अवसर पर श्री नागेश्वर महादेव मंदिर श्री दण्डी स्वामी आश्रम अरैल में अपने भक्तों के साथ भगवान नागेश्वर का अभिषेक पूजन करते हुए श्री मद् जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी महेशाश्रम जी महाराज ने सहस्त्र कमल पुष्पो के साथ भगवान नागेश्वर का बृहद श्रृंगार किया
नागपंचमी का महात्म बताते हुए महाराज श्री ने बताया एक बार भगवान शिव माता पार्वती सहित पृथ्वी का भ्रमण करते हुए गंगा के तट पर पहुँचे और आसन लगाकर बैठ गए उसी समय भगवान विष्णु लक्ष्मी सहित भगवान शिव के दर्शन हेतु गंगा के दुसरे तट पर आए वहां एक ब्राह्मण बालक जिसका नाम चन्द्रमुख था ।भगवान शिव का पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूजन कर रहा था भगवान विष्णु और लक्ष्मी ने वृद्ध ब्राह्मण और ब्राम्हणी का भेष बनाकर उस बालक से गंगा पार कराने के लिए आग्रह किया तो उस बालक ने लक्ष्मी नारायण को अपने पीठ पर बैठाकर गंगा पार कराया गंगा पार होते ही लक्ष्मी नारायण अपने स्वरूप में प्रगट हो गए उस बालक से बोले तुमने हमे अपने पीठ पर बैठाकर गंगा पार कराया है इसीलिए हम तुम्हें इच्छित वर देना चाहते हैं तुम मांग लो तब वो ब्राह्मण बालक घुटने के बल बैठकर भगवान लक्ष्मी नारायण से प्रार्थना किया की अब दोनो को पीठ पर बैठाने से जो आनंद मुझे प्राप्त हुआ वो आनंद सदा हमे प्राप्त होते रहें भगवान नारायण ने कहा जिस दिन तुम यह शरीर का त्याग करोगे उस दिन तुम्हारा जन्म शेषनाग के रूप में होगा तो सदा सर्वदा तुम्हारे पीठ पर निवास करुगा ऐसा सुनकर ब्राह्मण बालक ने भगवान गौरी शंकर का ध्यान करते हुए उसी समय अपना प्राण त्याग कर दिया चन्द्र मुख नाम का ब्राह्मण बालक का ऐसा त्याग देखकर भगवान गौरी शंकर भी वहाँ प्रकट हो गए और हरि हर दोनो ने मिलकर उस नाग बने ब्राह्मण को आशीर्वाद दिया कि जो भी प्राणी आज के जो भी बिधवत पूजन करेगा उसे हम दोनो के दर्शन का फल प्राप्त होगा और उसकी कभी अकाल मृत्यु नही होगी नागपंचमी के दिन ही भगवान शिव ने ब्राह्मण से नाग बने उस शेषनाग को अपने गले में धारण किया और उसी दिन भगवान ने भी शेष को अपनी शैया बनाकर निवास करने लगे तब से नागपंचमी का त्यौहार मनाने जाने लगा।