सावन के आखिरी सोमवार को उमड़ी भक्तों की भीड़

सावन का आज चौथा और अंतिम सोमवार है। व्रत रख श्रद्धालु गंगा स्‍नान कर शिव पूजन में लीन हैं। हर ओर आस्‍था की बयार बह रही है।

 

शिवालय में रहा हर हर महादेव की गूंज

 

शहर समेत ग्रामीण अंचल के शिवालयों व मंदिरों में भगवान शिव की आराधना हो रही है। बेलपत्र, बिल्‍व, फूल माला, गंगाजल, दूध, दही से शिवशंकर का अभिषेक हो रहा है। ऊं नमह शिवाय के उद्घोष से शिव मंदिर गुंजायमान हैं। मंदिरों में धार्मिक आयोजन हो रहे हैं तो घरों में भी पूजन-अर्चन के साथ भजन-कीर्तन हो रहा है। हर ओर भक्तिरस की गंगा बह रही है।इन नक्षत्रों का है अद्भुत संयोग
है। मनकामेश्वर मंदिर के महंत श्रीधरा नंद जी महाराज के अनुसार सावन के चौथे सोमवार पर ग्रह नक्षत्रों का भी अद्भुत संयोग है। अनुराधा नक्षत्र, ब्रह्मयोग, यायिजय योग, सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग आज है। ऐसे में भगवान शिव का सच्‍चे मन से पूजन-अर्चन भक्‍तों द्वारा करने से उनके सारे मनोरथ पूरे होंगे। शिव की कृपा भक्‍तों पर बरसेगी।

सच्‍चे ह्दय से व्रत, अनुष्‍ठान करने से प्रसन्‍न होते हैं शिव

उल्‍लेखनीय है कि सावन में सभी देवता शयन (निद्रा) करते हैं। वहीं भगवान शिव जाग्रत रहते हैं। इसी कारण यह माह शिवशंकर को समर्पित किया गया है। व्रत रखकर रुद्राभिषेक, महाभिषेक और जलाभिषेक करने से भगवान शिव प्रसन्‍न होकर मनोवांछित फल प्रदान करते हैं। धर्माचार्यो का कहना है कि व्रत व अनुष्‍ठान करने वालों पर शिव सौभाग्‍य की वर्षा करते हैं। महिलाएं सुख-समृद्धि की कामना के लिए अविवाहित कन्‍याएं मनोवांछित वर की प्राप्ति के लिए शिवशंकर की उपासना करें। पुरुष दैहिक, दैविक और भौतिक कष्‍टों से मुक्ति के लिए शिव का पूजन करें।

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