ना आसरा था कोई शाहे करबलाई को फ़क़त बहन ने किया था सवार भाई को

( अनुराग शुक्ला )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। मजलिसे ग़म मे हुसैन मज़लूम की शहादत पर हर लबों सदा ए या हुसैन और हर आँखे अश्कबार हो गई।जब करबला मे इमाम हुसैन के मात्र बहत्तर लोगों के बीच यज़ीद के ज़ुल्म और ज़ियादती का ज़िक्र सुना तो हर तरफ से आहो बुका की सदा गूँजने लगी।रौशन बाग़ मे नासिर ज़ैदी के अज़ाखाने मे मजलिस ए सय्यदूश्शोहदा मे मौलाना रज़ी हैदर ने खिताब करते हुए हुसैन ए मज़लूम की शहादत का ज़िक्र किया।कहा जब सारे अज़ीज़ और अक़रोबा शहीद हो गए तो इमाम हुसैन को जंग मे जाने के लिए घोड़े पर सवार करने वाला कोई नही बचा तो बहन ज़ैनब ने बढ़ कर भाई को सवार किया।वहीं मजलिस से पहले शहंशाह हुसैन सोनवी ने मर्सिया पढ़ा

*ना आसरा था कोई शाहे करबलाई को-फक़त बहन ने किया था सवार भाई को*
मर्सिइया सुन कर लोग आँखो मे अश्क भर कर हुसैन ए मज़लूम पर ढाए गए ग़मगीन वाक़िये को सुन कर खूब रोए।अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया के नौहाख्वानो ने पुरदर्द नौहा पढ़ा।दरियाबाद मे इमामबाड़ा नवाब बेगम मे आग़ा मो०सिबतैन की बरसी की मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना रज़ी हैदर ने ग़मगीन मसायब पढ़े।सोज़ख्वान नज़र अब्बास खाँ ने सोज़ व सलाम पढ़ा।डॉ क़मर आब्दी ने पेशख्वानी के ज़रीये बहत्तर शहीदों को खेराजे अक़ीदत पेश करते हुए ताज़ियती अशआर से मजलिस को संजीदा बना दिया।अन्जुमन मोहाफिज़े अज़ा क़दीम के नौहाख्वानो ने नौहा और मातम का नज़राना पेश किया।मजलिस मे हसन नक़वी,बाक़र नक़वी,सैय्यद अज़ादार हुसैन मशहद अली खाँ,शफक़त पाशा,सफदर अब्बास सै०मो०अस्करी,अब्बास ज़ैदी अर्शी,फैज़याब हैदर,ज़ौरेज़ हैदर,अकबर,यासिर सिबतैन ज़ामिन हसन,औन ज़ैदी,जौन ज़ैदी आदि शामिल रहे।

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