
( विनय मिश्रा )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। टैगोर पब्लिक स्कूल के वरिष्ठ रसायन शास्त्र शिक्षक संजय श्रीवास्तव ने ‘शिक्षक दिवस’ कि पूर्व संध्या पर हिंदुस्थान के साथ एक साक्षातकार मे कहा कि कोरोना काल कि विषम परिस्थितियों में शिक्षकों का अपने विद्यार्थियों के प्रति नैतिक दायित्व बढ़ गया है। उन्हें अपने विद्यार्थियों का न केवल सही मार्गदर्शन करना है, बल्कि जीवन की चुनौतिओं का साहस और विवेक पूर्ण ढंग से सामना करते हुए, अपने लक्ष्य को पाने का गुण भी सिखाना है। सच में सही शिक्षक वह है जो अपने विद्यार्थियों की दिशा और दशा बदल दे। उन्हें परिवार, समाज और देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने की प्रेरणा देकर एक सभ्य नागरिक बना सके।
ज्ञातव्य है कि टैगोर पब्लिक school के वरिष्ठ रसायन विज्ञान शिक्षक संजय श्रीवास्तव पिछले तीस वर्षों से शिक्षण कार्य से जुड़े हैं और विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति अभिरुचि उत्पन्न करने और विज्ञान के सिद्धांतों को अत्यंत सरल ढंग से अपने शिक्षण विधि ‘विज्ञान कर के सीखो’ के माध्यम से विद्यार्थियों में अत्यंत लोकप्रिय हैं। जिसके लिए भारत सरकार के राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, भारत से सर्वश्रेष्ठ विज्ञान शिक्षक, उत्तर प्रदेश सरकार के विज्ञान एवम् प्रौधोगिकी संचार परिषद् द्वारा राज्य विज्ञान शिक्षक अवार्ड, भारत रत्न प्रो. सी. एन. आर. राव द्वारा बेंगलुरू में नेशनल आउट स्टैंडिंग साइंस टीचर अवार्ड सी. एन. आर. फाउंडेशन द्वारा प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त संजय श्रीवास्तव को विभिन्न सामाजिक संगठनों और गैर सरकारी संगठनों से विद्यार्थियों में विज्ञान के लोकप्रिय करण के लिए अनेकों बार सम्मानित किया जा चुका है। जिसमें एशिया पैसिफिक ग्लोबल अवार्ड, शिक्षा रत्न अवार्ड, विज्ञान संचारक सम्मान, ग्लोबल ग्रींस पर्यावरण संरक्षण सम्मान, विज्ञान सक्रियक अवार्ड एवम् विज्ञान रत्न अवार्ड जैसे सम्मान मिल चुके हैं। अपने विद्यार्थियों में पर्यावरण के संरक्षण के प्रति चेतना और जागरूक ता के लिए सजग रहते हैं। जिसके लिए विद्यार्थियों को विभिन्न वैज्ञानिक गतिविधियों से जोड़ कर उन्हें अपने पर्यावरण से जुड़ने का प्रत्यक्ष मौका देतें हैं और उन्हें जल, मिट्टी और वायु को प्रदूषण से बचाने की मुहिम से जोड़ते हैं। पर्यावरण पर आधारित उनकी पुस्तकें पर्यावरण प्रदूषण के खतरे और ग्रीन कुंभ, क्लीन कुम्भ पाठकों में बहुत लोकप्रिय है। उनके द्वारा लिखी तीसरी “पुस्तक पानी रे पानी तेरा रंग कैसा”, प्रकाशन के लिए अग्रसर है।